बेंगलुरु, 1 सितंबर (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), बेंगलुरु ने अक्षता मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड और अन्य के मामले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 की धारा 5(1) के तहत मंगलवार को एक प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया है। इसके तहत एचडीएफसी बैलेंस्ड एडवांटेज फंड की 62,914.316 यूनिट्स (चल संपत्ति) को जब्त किया गया है, जिनकी मौजूदा बाजार कीमत लगभग 3.31 करोड़ रुपए है।
एजेंसी ने मंगलवार को जानकारी दी कि ईडी ने यह जांच सीबीआई, एससीबी, बेंगलुरु द्वारा अक्षता मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड, उसके डायरेक्टरों और अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल के आरोपों पर दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी।
जांच में पता चला कि आयरन ओर (लौह अयस्क) की ट्रेडिंग और एक्सपोर्ट करने वाली कंपनी अक्षता मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड ने छह संपत्तियों को इक्विटेबल मॉर्गेज (गिरवी) रखकर बैंक ऑफ इंडिया से लगभग 6 करोड़ रुपए की क्रेडिट सुविधा ली थी। इनमें से एक संपत्ति, जो बेंगलुरु के जयामहल में स्थित है, के बारे में गलत जानकारी दी गई थी कि वह स्वर्गीय लक्ष्मम्मा की है। मॉर्गेज बनाने के लिए बैंक को कथित तौर पर जाली खाता रिकॉर्ड, टैक्स-पेमेंट रसीदें, बेटरमेंट चार्ज रसीदें और अन्य रेवेन्यू दस्तावेज जमा किए गए थे। बैंक ऑफ इंडिया ने उस संपत्ति के बदले 3 करोड़ रुपए जारी किए थे।
जांच में यह भी पता चला कि अपराध से हुई कमाई का हिस्सा रही 1 करोड़ रुपए की रकम 13 फरवरी 2010 को अक्षता मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खाते से कैथोलिक डायोसिस ऑफ बेल्लारी ट्रस्ट को ट्रांसफर की गई थी। बाद में इस रकम को अलग-अलग एचडीएफसी म्यूचुअल फंड स्कीमों में इन्वेस्ट और री-इन्वेस्ट किया गया।
मनी ट्रेल (पैसे के लेन-देन का रास्ता) से पता चला कि अपराध से जुड़ी मूल रकम लगातार किए गए इन्वेस्टमेंट के जरिए पहचानी जा सकती थी और आखिरकार वह एचडीएफसी बैलेंस्ड एडवांटेज फंड की 62,914.316 यूनिट्स के रूप में सामने आई। इन यूनिट्स की कीमत मूल 1 करोड़ रुपए से बढ़कर आज लगभग 3.31 करोड़ रुपए हो गई है। यह बढ़ोतरी अपराध से हुई कमाई से मिला फायदा या उससे जुड़ी संपत्ति है।
इससे पहले ईडी ने 28 मार्च 2026 को बेंगलुरु की विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत भी दायर की थी। वहीं, ईडी की ओर से इस मामले से संबंधित आगे की जांच जारी है।
