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सीजीपीएससी पेपर लीक मामले में ईडी की कार्रवाई, छत्तीसगढ़ के 5 ठिकानों पर छापेमारी

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रायपुर, 2 सितंबर (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रायपुर जोनल ऑफिस ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ के रायपुर, दुर्ग, धमतरी और जशपुर जिलों में पांच जगहों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002’ के तहत की गई।

ईडी ने बुधवार को बताया कि यह मामला छत्तीसगढ़ पब्लिक सर्विस कमीशन (सीजीपीएससी) द्वारा आयोजित भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और भ्रष्टाचार से जुड़ा है।

ईडी की जांच ईओडब्ल्यू, एसीबी, रायपुर और सीबीआई, एसीबी, रायपुर द्वारा दर्ज 2 एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। ये एफआईआर सीजीपीएससी के तत्कालीन चेयरमैन तमन सिंह सोनवानी और अन्य लोगों के खिलाफ 2020 और 2021 में आयोजित सीजीपीएससी स्टेट सर्विस परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं, हेरफेर और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर दर्ज की गई थी।

जांच ​​से पता चला कि सीजीपीएससी परीक्षाओं के पेपर निजी दलालों के जरिए आरोपी व्यक्तियों के रिश्तेदारों और चुने हुए उम्मीदवारों को रिश्वत के बदले लीक किए गए थे। इस तरह डिप्टी कलेक्टर और डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस जैसे वरिष्ठ सरकारी पदों पर धोखाधड़ी से चयन सुनिश्चित किया गया। आगे की जांच में पता चला कि उत्कर्ष चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने सीजीपीएससी-2021 परीक्षा के लीक पेपर उपलब्ध कराने का भरोसा देकर नौकरी के उम्मीदवारों से नकद पैसे लिए और 3 करोड़ रुपए से ज्यादा की ‘अपराध से कमाई’ की।

इसमें से लगभग 2.80 करोड़ रुपए अनिल चंद्राकर को सौंपे गए। उत्कर्ष चंद्राकर ने नौकरी के उम्मीदवारों को प्रभावित करने और उनसे पैसे वसूलने के लिए केके चंद्रवंशी (जो छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री के तत्कालीन पर्सनल असिस्टेंट और उनके मामा थे) और तत्कालीन मुख्यमंत्री के ऑफिस में तत्कालीन ‘ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी’ (ओएसडी) के नाम, पद और प्रभाव का इस्तेमाल किया।

पहले इस मामले में ईडी ने 3 जून को तलाशी ली थी। जमा किए गए सबूतों, पीएमएलए, 2002 की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों, उनके मोबाइल फोन से मिले डिजिटल सबूतों और उनके बैंक स्टेटमेंट के विश्लेषण के आधार पर यह साबित हुआ कि उत्कर्ष चंद्राकर जानबूझकर अपराध से हुई कमाई से जुड़ी प्रक्रियाओं और गतिविधियों में शामिल थे। इन गतिविधियों में कमाई करना, उसे हासिल करना, अपने पास रखना, छिपाना, लेयरिंग करना, ट्रांसफर करना, इस्तेमाल करना और उसे साफ-सुथरी संपत्ति के तौर पर दिखाना शामिल है।

इसके बाद, उन्हें पीएमएलए, 2002 की धारा 19 के तहत मंगलवार को गिरफ्तार किया गया। तलाशी के दौरान अपराध से संबंधित दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस, फाइनेंशियल रिकॉर्ड, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और जांच से जुड़े अन्य सबूत जब्त किए गए। वहीं, ईडी की ओर से इस मामले से संबंधित आगे की जांच और कार्रवाई जारी है।