मुंबई, 3 सितंबर (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुंबई जोनल ऑफिस ने साइप्रस-बेस्ड गैर-कानूनी ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म ‘पैरीमैच’ की चल रही जांच के तहत बुधवार को महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली, गुजरात और उत्तर प्रदेश में 17 जगहों पर तलाशी अभियान चलाया।
ईडी ने यह जांच मुंबई के साइबर पुलिस स्टेशन में पैरीमैच के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। आरोप है कि इस प्लेटफॉर्म ने ऑनलाइन बेटिंग के जरिए यूजर्स को धोखा दिया। जांच में पता चला है कि प्लेटफॉर्म ने ज्यादा रिटर्न का लालच देकर एक वर्ष में 3,000 करोड़ रुपए से ज्यादा कमाए।
ईडी को जांच में पैरीमैच बेटिंग नेटवर्क से हुई कमाई को इधर-उधर करने और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए एक मल्टी-लेयर्ड सिस्टम का पता चला है। बेटिंग से हुई कमाई को शुरू में कई ‘म्यूल अकाउंट्स’ के जरिए भेजा गया, जिनमें मर्चेंट अकाउंट्स के तौर पर बनाए गए अकाउंट्स भी शामिल थे। इसके बाद, इस पैसे को देखने में वैध लगने वाले फाइनेंशियल और कमर्शियल चैनलों के जरिए कई लेयर्स में घुमाया गया।
जांच में यह भी पता चला कि बेटिंग से हुई कमाई को छिपाने के लिए कैश मैनेजमेंट सिस्टम (सीएमएस) और डोमेस्टिक मनी ट्रांसफर (डीएमटी) एजेंट्स का इस्तेमाल किया गया। मर्चेंट/म्यूल अकाउंट्स में आए पैसे को सीएमएस/डीएमटी से जुड़े अकाउंट्स में भेजा गया, जहां बैंकिंग फंड्स ने वैध कैश कलेक्शन साइकल की जगह ले ली, जबकि बेटिंग नेटवर्क से जुड़े लोगों को उतना ही फिजिकल कैश उपलब्ध कराया गया।
इसके बाद, इस कैश को हवाला/क्रिप्टो ऑपरेटर्स के जरिए डीएमटी में बदला गया और ऑफशोर पैरीमैच नेटवर्क द्वारा कंट्रोल किए जाने वाले क्रिप्टो वॉलेट्स में ट्रांसफर कर दिया गया। पैरीमैच नेटवर्क से आए पैसे को पेमेंट इंटरमीडियरीज के जरिए भारतीय टूर और ट्रैवल ऑपरेटर्स के बैंक अकाउंट्स में भेजा गया, जबकि इसके बदले में कोई सर्विस नहीं दी गई।
इन बैंकिंग क्रेडिट्स का इस्तेमाल ट्रैवल ऑपरेटर्स को उनके विदेशी क्लाइंट्स से मिलने वाली रकम का हिसाब-किताब करने के लिए किया गया, जबकि उतनी ही रकम भारत के बाहर पैरीमैच के हैंडलर्स ने उन क्लाइंट्स से फिजिकल कैश के तौर पर वसूल की। ऐसे दो टूर और ट्रैवल ऑपरेटर्स के जरिए कम से कम 200 करोड़ रुपए का ट्रांजैक्शन किया गया।
इस दौरान एक समानांतर सिस्टम का भी पता चला, जिसमें फर्जी ओवरसीज डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (ओडीआई) ट्रांजैक्शन्स और सर्विस के फर्जी इंपोर्ट्स शामिल थे। इसके जरिए बेटिंग से हुई कमाई को कई लेयर्स में घुमाया गया और विदेश भेजा गया। इन सिस्टम्स के जरिए 500 करोड़ रुपए का ट्रांजैक्शन किया गया। इन रेमिटेंस (विदेश भेजे गए पैसे) के लिए ओडीआई की फर्जी वैल्यूएशन रिपोर्ट और जाली फॉर्म डॉक्यूमेंट्स का इस्तेमाल किया गया था, जबकि असल ट्रांजैक्शन में कोई वास्तविक कमर्शियल आधार नहीं था।
ईडी की जांच में ‘म्यूल’ और मर्चेंट अकाउंट, सीएमएस और डीएमटी एजेंट, टूर और ट्रैवल ऑपरेटर, घरेलू कंपनियां, विदेशी निवेश स्ट्रक्चर, हवाला ऑपरेटर और क्रिप्टो चैनल का एक जटिल नेटवर्क सामने आया है। आरोप है कि इनका इस्तेमाल गैर-कानूनी ऑनलाइन सट्टेबाजी से हुई कमाई को छिपाने, उसकी परतें बनाने और उसे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था।
छापेमारी के दौरान लगभग 2.11 करोड़ रुपए की चल संपत्ति जब्त की गई, जिसमें लगभग 61 लाख रुपए नकद, 1 किलो सोने की ईंट और कई आपत्तिजनक डॉक्यूमेंट्स व डिजिटल डिवाइस शामिल हैं। इसके साथ ही लगभग 37 करोड़ रुपए का बैंक बैलेंस भी फ्रीज किया गया।
ईडी ने इस मामले में अब तक लगभग 150 करोड़ की संपत्ति फ्रीज/जब्त की है।
