मुंबई, 4 सितंबर (आईएएनएस)। दिशा सालियान मामले में सतीश सालियान की ओर से पेश वकील नीलेश ओझा ने एफएसएल रिपोर्ट, कथित फॉरेंसिक रिकॉर्ड और मामले की सीबीआई जांच को लेकर कई गंभीर दावे किए हैं। उन्होंने कहा कि बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें एफएसएल रिपोर्ट उपलब्ध हुई, जिसके बाद मामले में कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज सामने आए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
नीलेश ओझा ने कहा कि हाई कोर्ट के आदेश में मामले से जुड़े रिकॉर्ड में विरोधाभास सामने आया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, डेथ सर्टिफिकेट और पुलिस के कवरिंग लेटर में सैंपल लिए जाने का उल्लेख है, जबकि बाद में फॉरेंसिक स्तर पर केवल स्मीयर मिलने की बात कही गई। 12 जून 2020 के पुलिस पत्र में पोस्टमार्टम के दौरान लिए गए सैंपल की जांच का अनुरोध किया गया था। इसके बाद 16 जून और 3 अगस्त के पत्रों में भी संबंधित फॉरेंसिक सामग्री की जांच और रिपोर्ट जल्द उपलब्ध कराने की बात कही गई थी। अब ये दस्तावेज सीबीआई को सौंपे जाएंगे।
वकील ने आरोप लगाया कि रिकॉर्ड में कथित बदलाव और जांच से जुड़े सवालों की स्वतंत्र जांच जरूरी है। इस संबंध में उनके पास अन्य सबूत और प्रत्यक्षदर्शी भी हैं।
आदित्य ठाकरे द्वारा मामले पर बात नहीं करने और खुद को राजनीतिक रूप से निशाना बनाए जाने के कथित बयान पर ओझा ने सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि ठाकरे ने इस मामले में हस्तक्षेप याचिका दायर की थी और सीबीआई जांच के खिलाफ आपत्ति जताई थी। ओझा ने आरोप लगाया कि ठाकरे की ओर से मामले से जुड़े कुछ तथ्यों को लेकर अदालत में दिए गए दावों पर सवाल उठे और बाद में स्पष्टीकरण देना पड़ा। उन्होंने कहा कि यदि उनका इस मामले से कोई संबंध नहीं है तो सीबीआई जांच का विरोध करने की जरूरत नहीं थी।
वकील ने ठाकरे और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ कई अन्य आरोप भी लगाए और कहा कि इन दावों के संबंध में उनकी ओर से पहले उठाए गए सवालों का जवाब अभी तक नहीं मिला है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई जांच की प्रक्रिया पर ओझा ने कहा कि उनकी कानूनी टीम सीबीआई कार्यालय पहुंची और अधिकारियों से मुलाकात की। सीबीआई ने संबंधित पुलिस अधिकारियों को मामले के दस्तावेज सौंपने के लिए नोटिस जारी किया है। दिल्ली से एक वरिष्ठ अधिकारी को मामले की जिम्मेदारी दी जा रही है। अधिकारी के नामांकन के बाद आगे की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि सतीश सालियान की ओर से टीम सीबीआई के साथ समन्वय करेगी और एफआईआर पंजीकरण की प्रक्रिया में भी सहयोग करेगी।
सुशांत सिंह राजपूत की बहन श्वेता सिंह राजपूत की सोशल मीडिया पोस्ट का उल्लेख करते हुए ओझा ने कहा कि उन्होंने सत्य और न्याय की बात कही है। ओझा ने कहा कि दिशा सालियान और सुशांत सिंह राजपूत से जुड़े मामलों को लेकर कई सवाल अब भी जांच के दायरे में हैं। दोनों मामलों के बीच संबंधों को लेकर भी जांच में तथ्य सामने आने चाहिए। ओझा ने इसे आम लोगों और प्रभावशाली लोगों के बीच न्याय की लड़ाई बताया और कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सीबीआई जांच से पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी।
