वारसॉ, 5 सितंबर (आईएएनएस)। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को वारसॉ स्थित कोल्हापुर मेमोरियल पर श्रद्धांजलि अर्पित की, जो द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान लगभग 5,000 पोलिश महिलाओं और बच्चों को शरण देने की भारत की मानवीय पहल का प्रतीक है।
स्मारक पर लिखे शिलालेख का उल्लेख करते हुए, जिसमें लिखा है, “दुनिया भर में बिखरे हुए, हम भारत को याद करते हैं। हार्दिक आभार के साथ,” विदेश मंत्री ने पोलिश लोगों के बीच भारत की उदारता के प्रति स्थायी आभार को रेखांकित किया।
विदेश मंत्री ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “वारसॉ में कोल्हापुर मेमोरियल पर श्रद्धांजलि अर्पित की, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 5,000 पोलिश महिलाओं और बच्चों को दिए गए आश्रय को याद किया। उदारता का यह कार्य आज भी पोलिश लोगों की स्मृति में ताजा है।”
कोल्हापुर मेमोरियल का निर्माण वारसॉ में कोल्हापुर के शाही परिवार को श्रद्धांजलि के रूप में किया गया था, जिसने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान विस्थापित हुए पोलैंड की महिलाओं और बच्चों को भारत में आश्रय देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
विदेश मंत्री जयशंकर ने वारसॉ में डोबरी महाराजा मेमोरियल पर भी श्रद्धांजलि अर्पित की, जो द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 1,000 पोलिश बच्चों के प्रति करुणा दिखाने के लिए नवानगर के जामसाहब दिग्विजयसिंहजी रणजीतसिंहजी जडेजा को सम्मानित करता है।
इस दौरान पोलिश सांसद किंगा गजेवस्का और ओचोटा के मेयर पियोटर क्रासनोदेब्स्की भी उनके साथ मौजूद रहे।
विदेश मंत्री ने एक्स पर लिखा, “आज वारसॉ में जामनगर के ‘डोबरी महाराजा’ के स्मारक का दौरा किया। साथ रहने के लिए सांसद किंगा गजेवस्का और ओचोटा के मेयर पियोटर क्रासनोदेब्स्की का धन्यवाद। जामसाहब दिग्विजयसिंहजी रणजीतसिंहजी जी को द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 1,000 पोलिश बच्चों की देखभाल के लिए प्यार से याद किया जाता है। उनकी गर्मजोशी और करुणा भारत और पोलैंड के बीच एक स्थायी सेतु बनी हुई है।”
डोबरी महाराजा मेमोरियल नवानगर, जो वर्तमान में गुजरात का जामनगर है, के जाम साहब दिग्विजयसिंहजी रणजीतसिंहजी जडेजा की द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान दयालुता को सम्मानित करता है।
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जामसाहब ने एक हजार से अधिक पोलिश बच्चों को आश्रय प्रदान किया था और आज उन्हें पोलैंड में डोबरी महाराजा के रूप में याद किया जाता है।
उनकी उदारता का गहरा प्रभाव आज भी पोलिश लोगों के बीच जीवित है और यह भारत और पोलैंड के बीच संबंधों के सबसे मार्मिक अध्यायों में से एक है।
शुक्रवार को विदेश मंत्री ने वारसॉ में पोलैंड के राष्ट्रपति करोल नवरॉकी से मुलाकात की और भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी की सकारात्मक दिशा पर चर्चा की।
विदेश मंत्री जयशंकर ने एक्स पर लिखा, “पोलैंड के राष्ट्रपति करोल नवरॉकी से मिलकर खुशी हुई। हमारी बातचीत हमारी रणनीतिक साझेदारी की सकारात्मक दिशा पर केंद्रित रही। यूक्रेन संघर्ष, मध्य पूर्व/पश्चिम एशिया, आईएमईसी और जी20 पर विचारों का आदान-प्रदान किया।”
उन्होंने भारत-पोलैंड संसदीय समूह से भी मुलाकात की और समकालीन भारत-पोलैंड संबंधों को आकार देने पर अपने विचार साझा किए।
