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रूस की वॉर विक्ट्री प्रतिमा से आहत जापान, मास्को से इसे हटाने का किया अनुरोध

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टोक्यो, 5 सितंबर (आईएएनएस)। जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची और विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी ने शनिवार को रूस से खबारोव्स्क में लगाई गई ‘वॉर विक्ट्री प्रतिमा’ को हटाने की अपील की। ​​इस मूर्ति में एक सोवियत सैनिक को ‘क्रिसेंथेमम’ (गुलदाउदी के फूल जैसा) निशान वाले पत्थर के खंभे या मार्कर को नष्ट करते हुए दिखाया गया है।

‘क्रिसेंथेमम’ का निशान जापान की पहचान माना जाता है। क्योडो न्यूज एजेंसी ने बताया कि ताकाइची का कहना है कि इसके विनाश को दिखाने वाले स्मारक को लगाना “बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं” है।

वहीं, विदेश मंत्री ने एक बयान जारी कर कहा, “4 सितंबर को खाबरोव्स्क में लगाई गई कांस्य प्रतिमा में जापानी चिह्न को नष्ट करते दिखाना बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। ये प्रतिमा रचनात्मक नहीं कही जा सकती खासकर तब जब गुलदाउदी का फूल जो जापान को दर्शाता है। ये जापानी लोगों की भावनाओं को आहत करता है। हमने रूसी पक्ष से इसे हटाने का अनुरोध किया है। ये भी दुखद है कि अब तक उन्होंने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन जापान पूरी ताकत से इसके खिलाफ अपनी बात रखता रहेगा।”

यह स्मारक रूस के सुदूर पूर्वी शहर खाबरोव्स्क के ‘मुराव्योव-अमूर्स्की रीजनल पार्क’ में स्थापित किया गया। इसकी ऊंचाई 15 मीटर की है। इसमें सोवियत सैनिक अपनी बंदूक से एक पत्थर को तोड़ते हुए देखा जा सकता है। इस पत्थर पर गुलदाउदी का चिह्न अंकित है, जो जापान के शाही परिवार और सैन्यवाद का प्रतीक माना जाता है।

जापान और रूस के बीच पिछले कुछ दिनों में तल्खी बढ़ी है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बुधवार को ही कहा था कि टोक्यो और मास्को के बीच रिश्तों में आई खटास “पूरी तरह से जापान की गलती” है। यह बयान पिछले महीने होक्काइडो के पास रूस के कब्जे वाले और जापान द्वारा दावा किए गए द्वीप समूह की उनकी पहली यात्रा पर हुई आलोचना के बाद दिया गया था।

पुतिन ने शंघाई सहयोग संगठन के लिए किर्गिस्तान की यात्रा के दौरान पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा था कि मॉस्को ने जापान के साथ अपने रिश्तों को “बहुत सावधानी” से संभाला है। वे इन द्वीपों (जिन्हें जापान में ‘उत्तरी क्षेत्र’ और रूस में ‘दक्षिणी कुरील’ कहा जाता है) के बारे में शांति वार्ता करने के लिए तैयार थे, भले ही यह मामला पहले ही “सुलझाया जा चुका” था।

वहीं, जापान का कहना है कि एतोरिफु, कुनाशिरी, शिकोटान और हाबोमाई द्वीप समूह पर सोवियत संघ ने दूसरे विश्व युद्ध में जापान के आत्मसमर्पण के तुरंत बाद गैर-कानूनी तरीके से कब्जा कर लिया था। वहीं, रूस का तर्क है कि यह कब्जा वैध था। जापान की सरकार ने जवाब में कहा कि पुतिन की बातें “स्वीकार्य योग्य नहीं” हैं।

चीफ कैबिनेट सेक्रेटरी मिनोरू किहारा ने टोक्यो में एक नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये बातें कहीं।