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बिहार सरकार बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए कुछ नहीं कर रही, पूरा प्रबंधन फेल: सुधाकर सिंह

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पटना, 6 सितंबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय जनता दल के सांसद सुधाकर सिंह ने बिहार सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में बाढ़ प्रबंधन पूरी तरह विफल हो गया है। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों तक साफ पानी और अन्य जरूरी सुविधाएं भी नहीं पहुंचाई जा रही हैं।

पटना में आईएएनएस से बातचीत में राजद सांसद ने कहा कि बिहार में बाढ़ आना प्राकृतिक आपदा है। अत्यधिक बारिश के कारण बाढ़ आती है, लेकिन बाढ़ का प्रबंधन पूरी तरह फेल हो गया है। सरकार की नावें, जानवरों के लिए चारा और लोगों के लिए साफ पानी, कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है।

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े मामले पर सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर लाठी-डंडे लेकर बैठे लोगों में संघ से जुड़े लोग शामिल थे और बच्चों के साथ मारपीट की गई। उन्होंने सवाल उठाया कि तब कहा गया कि सिविल ड्रेस में पुलिस थे। लेकिन हकीकत सामने आई है, वे पुलिस नहीं गुंडे थे।

ओवैसी के मस्जिदों को लेकर दिए बयान पर राजद सांसद ने कहा कि धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मस्जिदों और मंदिरों को टारगेट किया जा रहा है। हमारी सांस्कृतिक आजादी प्रभावित हुई है। राम मंदिर में पैसे की लूट हुई है।

महाराष्ट्र में वीएचपी द्वारा डांडिया और गरबा आयोजनों में मुस्लिमों के प्रवेश पर रोक के सवाल पर सुधाकर सिंह ने कहा कि वीएचपी कौन है? सरकार को ऐसे लोगों को जेल में डालना चाहिए।

बिहार के स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए सुधाकर सिंह ने कहा कि राज्य में संस्थागत स्तर पर भ्रष्टाचार काफी गहरा है। एक रुपए की कीमत वाले सामान की कीमत 10 रुपए तक लगाई गई। सिस्टम में ऊपर से नीचे तक बैठे लोग इसमें शामिल थे। किसी ने इसे रोकने का प्रयास नहीं किया। मुख्यमंत्री इसके लिए उत्तरदायी हैं, क्योंकि सभी कॉरपोरेशन के चेयरमैन डेवलपमेंट कमिश्नर होते हैं और ये मुख्यमंत्री के अधीन काम करते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि विभागों की इसमें कोई भूमिका नहीं होती। कुछ विभाग सीधे भी टेंडर करते हैं। जिस संस्था की जिम्मेदारी बिहार के सरकारी अस्पतालों को उचित दर पर दवाइयां और चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराना है, यदि उसी संस्था में सरकारी धन की बंदरबांट हुई है, तो यह केवल वित्तीय अनियमितता का मामला नहीं, बल्कि बिहार के गरीब मरीजों के साथ विश्वासघात है। बिहार की जनता यह जानना चाहती है कि सरकारी अस्पतालों के लिए खरीदा जाने वाला डस्टबिन और मेडिकल सामान आखिर ऐसा कौन-सा वीआईपी सामान था, जिसकी कीमत बाजार दर से 10-12 गुना अधिक चुकाई गई।

राजद सांसद ने आरोप लगाया कि यदि यह सामान्य खरीद प्रक्रिया थी, तो बाजार दर और सरकारी खरीद दर के बीच इतना बड़ा अंतर क्यों है? उन्होंने इस पूरे मामले की जांच और जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग की।