SGSU Advertisement
Home राष्ट्रीय ‘प्रोजेक्ट ने निजी हितों को पूरा किया’, बीएमआईसीपी को लेकर पूर्व पीएम...

‘प्रोजेक्ट ने निजी हितों को पूरा किया’, बीएमआईसीपी को लेकर पूर्व पीएम देवेगौड़ा ने सीएम शिवकुमार को लिखा पत्र

0
6

बेंगलुरु, 7 सितंबर (आईएएनएस)। पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को एक खुला पत्र लिखकर राज्य कैबिनेट के उस फसले पर सवाल उठाए गए हैं, जिसमें बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर प्रोजेक्ट (बीएमआईसीपी) के तहत जमीन गंवाने वालों को 1,453 साइटें आवंटित करने की बात कही गई है।

पूर्व पीएम देवेगौड़ा का आरोप है कि यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और सरकार के अपने उस पुराने रुख के खिलाफ है, जिसके तहत प्रोजेक्ट के फ्रेमवर्क एग्रीमेंट के तहत सड़कों और सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए अधिग्रहित जमीन पर साइटें नहीं बनाई जा सकतीं।

देवेगौड़ा ने यह भी सवाल किया कि मदावारा, केंगेरी, कोम्माघट्टा और सोमपुरा समेत कई गांवों में आवंटित की जाने वाली प्रस्तावित साइटें कब और किसकी ओर से बनाई और मंजूर की गईं। नंदी इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर एंटरप्राइज लिमिटेड (एनआईसीईएल) के वित्तीय लेनदेन और बीएमआईसीपी पर हाईकोर्ट की हालिया टिप्पणियों का हवाला देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रोजेक्ट ने सार्वजनिक हित के बजाय निजी हितों को पूरा किया है।

पूर्व प्रधानमंत्री देवेगौड़ा ने शिवकुमार से पूछा कि क्या कैबिनेट का यह फैसला कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करते हुए साइट बनाने को मंजूरी देने जैसा है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या इस फैसले से जमीन गंवाने वालों के बजाय एनआईसीईएल और उसके निवेशक असली फायदा उठाने वाले होंगे।

पूर्व प्रधानमंत्री की ओर से पत्र में लिखा गया, “जब हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि एनआईसीईएल इंटरचेंज की जमीन पर ग्रुप हाउसिंग स्कीम और रिहायशी लेआउट बनाने के लिए प्लानिंग मंजूरी पाने का हकदार है, तो सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के रुख को सही ठहराया और साफ तौर पर कहा कि एनआईसीईएल पूरी तरह से फ्रेमवर्क एग्रीमेंट (एफडब्ल्यूए) से बंधा हुआ है। कोर्ट ने यह भी कहा कि इंटरचेंज पर और सड़क व सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के लिए सौंपी गई जमीन पर साइटें बनाना न केवल एफडब्ल्यूए की योजना का उल्लंघन है, बल्कि यह बीएमआईसीपी की मूल योजना (जो शहरी भीड़भाड़ को कम करने की है) के भी खिलाफ है।”

पूर्व पीएम ने पत्र में लिखा, “कोर्ट ने कंपनी के अकाउंट्स का फोरेंसिक ऑडिट करने को कहा, लेकिन साथ ही यह शक भी जताया कि क्या ऐसा कभी हो पाएगा, क्योंकि राज्य सरकार खुद ही प्रोजेक्ट प्रमोटर्स की मदद कर रही है ताकि वे अपनी एसेट्स का कैपिटलाइजेशन करके गैर-कानूनी तरीके से भारी मुनाफा कमा सकें।”

एच.डी. देवेगौड़ा की ओर से पत्र लिखा गया, “क्या आपकी कैबिनेट ने यह साबित कर दिया है कि कोर्ट का शक बिल्कुल सही है? क्या आपकी कैबिनेट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और उस सरकार के रुख के खिलाफ जाकर साइट्स बनाने की मंजूरी दी है, जिसके आप एक दशक से ज्यादा समय से मुखिया रहे हैं? क्या इन साइट्स का असली फायदा जमीन गंवाने वालों को नहीं, बल्कि एनआईसीईएल और उसके इन्वेस्टर्स को मिल रहा है? क्या आपके इन्वेस्टर्स आपकी कैबिनेट में ही हैं, मुख्यमंत्री जी? राज्य यह जानना चाहता है।”