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गुटीय विवाद पर केरल कांग्रेस का निर्देश, विवादित सहयोगी से दूरी बनाएं विधायक राम्या हरिदास

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तिरुवनंतपुरम, 7 सितंबर (आईएएनएस)। केरल में गुटीय विवाद के मामले में कांग्रेस नेतृत्व ने चिरायिनकीझु की विधायक राम्या हरिदास के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई न करने का फैसला किया है। इसके बजाय, पार्टी ने एक समझौतावादी रास्ता अपनाया है, जिसके तहत उनकी विवादित सहयोगी पलायम प्रदीप को इस पूरे विवाद से अलग करने की कोशिश की जाएगी। कांग्रेस का मानना है कि इस कदम से पार्टी के भीतर पैदा हुए विवाद को शांत किया जा सकेगा और आगे किसी बड़े टकराव से बचा जा सकेगा।

कांग्रेस की राज्य इकाई जल्द ही राम्या हरिदास को स्पष्ट निर्देश जारी कर सकती है कि वे पलायम प्रदीप को अपने सहयोगी के रूप में इस्तेमाल करना बंद करें और उन्हें अपने निर्वाचन क्षेत्र की राजनीतिक गतिविधियों से पूरी तरह दूर रखें।

यह फैसला स्थानीय कांग्रेस नेताओं की व्यापक शिकायतों के बाद किया गया है। नेताओं का आरोप है कि विधायक के साथ लगातार मौजूद रहने वाले प्रदीप पार्टी के मामलों में जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप कर रहे थे और क्षेत्रीय इकाई में पैदा हुए विवादों और तनाव की मुख्य वजह बन गए थे।

यह निर्णय राम्या हरिदास की कांग्रेस के महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल से बातचीत के बाद लिया गया। वेणुगोपाल ने विधायक को स्थानीय कांग्रेस नेतृत्व के साथ तालमेल बनाकर काम करने और गुटबाजी से बचने की सलाह दी है।

बैठक के बाद पार्टी नेतृत्व ने तय किया कि इस मामले को और बढ़ने नहीं दिया जाना चाहिए और इसके बजाय विवाद को सुलझाने की कोशिश की जानी चाहिए।

यह फैसला तब लिया गया है, जब हाल ही में राज्य कांग्रेस ने राम्या के सहयोगी और स्थानीय कांग्रेस नेताओं के बीच हुई हाथापाई को लेकर अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की थी।

पार्टी की जांच समिति की शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर प्रदीप और कांग्रेस कूथल्लूर मंडलम के उपाध्यक्ष एस. सज्जाद को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया था। समिति ने दोनों पक्षों की शिकायतों और जवाबी शिकायतों की जांच की थी।

जिला पंचायत सदस्य सज्जाद मुट्टाप्पलम और अन्य स्थानीय नेताओं ने आरोप लगाया था कि निर्वाचन क्षेत्र-स्तर के पार्टी मामलों में प्रदीप के लगातार दखल से नाराजगी पैदा हुई थी। उन्होंने शिकायत की थी कि पार्टी की बैठकों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी एक सहयोगी की भूमिका से कहीं ज्यादा थी।

दूसरी ओर, हरिदास और प्रदीप ने अपनी जवाबी शिकायत में आरोप लगाया कि मुट्टाप्पलम ने उन्हें अपने घर बुलाया था और उनके साथ मारपीट की थी।

पार्टी की जांच समिति ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट सौंपने से पहले चिरायिनकीज़ु के छह डीसीसी पदाधिकारियों और दो ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों के बयान दर्ज किए। इसके बाद पार्टी नेतृत्व ने पार्टी की छवि को हुए नुकसान का हवाला देते हुए दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों के खिलाफ कार्रवाई की।

राज्य कांग्रेस अध्यक्ष सनी जोसेफ और वरिष्ठ नेता के. मुरलीधरन ने इन घटनाओं पर सार्वजनिक रूप से नाराजगी जाहिर की थी और इन्हें पार्टी के लिए शर्मिंदगी का कारण बताया था। चूंकि नेतृत्व अब इस विवाद को खत्म करना चाहता है, इसलिए फिलहाल हरिदास या दूसरे पक्ष के खिलाफ किसी और कार्रवाई की उम्मीद नहीं है।

अब रणनीति साफ दिख रही है, विधायक को फटकार लगाना, उनके इर्द-गिर्द बने विवाद को खत्म करना, विरोधी गुटों को एक साथ लाना और उस अध्याय को बंद करना जिससे कांग्रेस को पहले ही काफी शर्मिंदगी उठानी पड़ी है।