रांची, 9 सितंबर (आईएएनएस)। झारखंड भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू की ओर से हेमंत सोरेन सरकार पर एसआईआर के जरिए बांग्लादेशियों के नाम वोटर लिस्ट में जुड़वाने के आरोप पर जेएमएम प्रवक्ता मनोज पांडेय ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि एसआईआर की निगरानी चुनाव आयोग करता है और इसमें केंद्र सरकार की भी भूमिका है। ऐसे में राज्य सरकार को इसके लिए जिम्मेदार ठहराना समझ से परे है।
मनोज पांडेय ने भाजपा पर पलटवार करते हुए दावा किया कि कई जगह उनके कार्यकर्ता लोगों के नाम मतदाता सूची से हटवाने की कोशिश करते पकड़े गए। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदाय के बड़े पैमाने पर नाम हटवाने की साजिश की गई।
जेपीएससी और जेएसएससी में अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर एफआईआर के मुद्दे को लेकर भाजपा के प्रदर्शन पर भी जेएमएम प्रवक्ता ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो लोग खुद सवालों के घेरे में हैं, वे दूसरों पर आरोप लगा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि छात्रों को लेकर राजनीति नहीं होनी चाहिए। छात्रों के खिलाफ राज्य सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की है। उन्होंने कुछ कोचिंग संचालकों पर भी भाजपा संरक्षण और फंडिंग के आरोप लगाए और कहा कि छात्रों को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। छात्र निर्दोष हैं और उन्होंने हेमंत सोरेन सरकार पर विश्वास जताया है।
भाजपा सांसद संजय सेठ द्वारा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर फिल्म ‘हनुमान अंश’ को टैक्स फ्री करने की मांग पर भी मनोज पांडेय ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल किया कि पहले भाजपा शासित राज्यों में यह फिल्म टैक्स फ्री हुई है या नहीं, यह देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि फिल्म को दर्शकों की अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है, तो इस मुद्दे पर राजनीति क्यों की जा रही है।
पांडेय ने भाजपा पर धार्मिक भावनाओं का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और कहा कि पहले भाजपा को अपने शासन वाले राज्यों में फिल्म को टैक्स फ्री कराने की पहल करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर दूसरे राज्यों में ऐसा किया जाता है तो झारखंड सरकार भी इस मांग पर विचार कर सकती है।
श्रीनगर में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के दौरान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के पूरा गीत बजने तक खड़े रहने के सवाल पर भी मनोज पांडेय ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत का सम्मान सभी को करना चाहिए, लेकिन हर राजनीतिक दल और व्यक्ति की अपनी विचारधारा और राय भी होती है।
उन्होंने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा के कई नेता भी कई मौकों पर पूरा वंदे मातरम नहीं गाते दिखाई दिए हैं। उन्होंने इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने के बजाय अलग-अलग दलों की सोच और विचारों के संदर्भ में देखने की बात कही।
दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी बिल्डिंग गिरने की घटना को लेकर मनोज पांडेय ने केंद्र सरकार पर शिक्षा और छात्रों से जुड़े मुद्दों की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने भाजपा सरकार के 12 वर्षों में बड़े कार्यालय बनने का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल क्यों नहीं बनाए गए।
उन्होंने शिक्षा बजट में कथित कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जब शिक्षा और छात्रों की सुविधाओं पर पर्याप्त खर्च नहीं होगा तो ऐसे हादसों और समस्याओं से कैसे निपटा जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास बड़े उद्योगपतियों के कर्ज माफ करने के लिए पैसा है, लेकिन छात्रों के लिए हॉस्टल, कॉलेज, अस्पताल और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दिखाई जाती।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नाराज फूफा’ वाले बयान पर भी मनोज पांडेय ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सिर्फ कोई एक वर्ग या व्यक्ति नाराज नहीं है, बल्कि छात्र, किसान, दलित और आदिवासी समेत समाज के कई वर्ग सरकार से नाराज हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा आलोचना करने वाले हर व्यक्ति को ‘नाराज फूफा’ बताने की कोशिश कर रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए मनोज पांडेय ने उन्हें “झूठ का बेताज बादशाह” कहा। उन्होंने चुनावी वादों का जिक्र करते हुए कहा कि जनता से 15 लाख रुपये, स्मार्ट सिटी और बुलेट ट्रेन जैसे कई वादे किए गए, लेकिन कई वादे अब तक पूरे नहीं हुए। उन्होंने महंगाई और गैस सिलेंडर की कीमतों को लेकर भी केंद्र सरकार पर हमला बोला।
