कठुआ, 9 सितंबर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के कठुआ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर 72 घंटे की हड़ताल शुरू कर दी है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से सेवाएं देने के बावजूद उन्हें समय पर वेतन, नियमित इंक्रीमेंट और नौकरी की सुरक्षा जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों ने सरकार से उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है।
स्टाफ नर्स भावना पठानी ने कहा कि एनएचएम के तहत कई कर्मचारी करीब 17 वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं। कर्मचारियों ने पहले भी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन किया है। 2017 के बाद अप्रैल में भी 48 घंटे की हड़ताल की गई थी। उस दौरान स्वास्थ्य मंत्री से कर्मचारियों की बातचीत हुई थी और उनकी समस्याओं पर विचार करने का आश्वासन दिया गया था। सरकार की ओर से यह कहा गया था कि एनएचएम केंद्रीय प्रायोजित योजना है और संबंधित मुद्दों का समाधान केंद्र स्तर पर होना चाहिए।
भावना ने कहा कि कर्मचारियों ने केंद्र के समक्ष भी अपनी बात रखी, जहां से उन्हें लिखित रूप में बताया गया कि यह मामला राज्य के अधिकार क्षेत्र से जुड़ा है। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री से कर्मचारियों की समस्याओं पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि 72 घंटे का शांतिपूर्ण प्रदर्शन मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
डॉ. नितिन शर्मा ने कहा कि एनएचएम कर्मचारी लंबे समय से लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं और अपनी पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं। कर्मचारियों को कई बार समय पर वेतन नहीं मिलता और इंक्रीमेंट भी निर्धारित समय पर नहीं लगती। कुछ कर्मचारियों को तीन-चार महीने की देरी के बाद वेतन मिलने की समस्या का सामना करना पड़ता है। उन्होंने नौकरी की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया और कहा कि कई कर्मचारी लंबे समय तक अस्थायी व्यवस्था में काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कर्मचारी स्वास्थ्य विभाग के तहत समान जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन वेतन और सुविधाओं में समानता नहीं है। कई कर्मचारियों के परिवार उनकी आय पर निर्भर हैं और वेतन में देरी से घरेलू खर्च चलाना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने सरकार से अपील की कि कर्मचारियों की आर्थिक परेशानियों और सेवा शर्तों को गंभीरता से देखा जाए।
डॉ. शर्मा ने आगे कहा कि पिछले चार-पांच महीनों में अधिकारियों और मंत्रियों के बीच कई बैठकें होने की जानकारी कर्मचारियों को दी गई, लेकिन अभी तक समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। वे काम करना चाहते हैं और स्वास्थ्य सेवाएं जारी रखना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए सरकार से समय पर वेतन, इंक्रीमेंट और सेवा सुरक्षा सहित बुनियादी सहयोग की जरूरत है।
