मुंबई, 11 सितंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश को लेकर जताई जा रही आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि देश के युवाओं ने नकारात्मक सोच को पीछे छोड़ दिया है और आगे बढ़कर भविष्य के उद्यम खड़े कर रहे हैं।
देश की आर्थिक राजधानी में ग्लोबल फिनटेक फेस्टिवल 2026 को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि भारत की युवा पीढ़ी पहले से ही कल की तकनीक और नए विचारों की नींव रख रही है, टिकाऊ उद्यम खड़े कर रही है और यह साबित कर रही है कि भारत का सबसे बड़ा जनसांख्यिकीय लाभ एक सक्रिय और अजेय वास्तविकता है।
उन्होंने कहा कि देश की युवा आबादी पहले से ही नवाचार, उद्यमिता और आर्थिक विकास को गति दे रही है और इसके लिए उत्पादकता के पारंपरिक पैमानों से किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं है।
वित्त मंत्री ने कहा कि कार्यक्रम में हजारों प्रतिभागियों द्वारा दिखाई गई ऊर्जा और महत्वाकांक्षा भारत के जनसांख्यिकीय लाभ की ताकत को दर्शाती है।
उन्होंने कहा, “हम देख रहे हैं कि यह ऊर्जा किस तरह दुनिया के सबसे शक्तिशाली डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के निर्माण से लेकर अरबों लेनदेन को संसाधित करने वाले यूपीआई तक, सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में मजबूती से खड़े होने और अंतरिक्ष अन्वेषण की नई सीमाएं तोड़ने तक, ऐतिहासिक प्रगति में बदल रही है।”
उन्होंने ग्लोबल फिनटेक फेस्टिवल में भागीदारी के व्यापक स्तर और विविधता का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें करीब 8,000 संगठनों का प्रतिनिधित्व था। उनके अनुसार, प्रतिभागियों में फिनटेक कंपनियों की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत, वित्तीय संस्थानों की 25 प्रतिशत, प्रौद्योगिकी से जुड़ी संस्थाओं की 43 प्रतिशत और सहायता सेवाओं की 12 प्रतिशत थी।
केंद्रीय मंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, लार्ज लैंग्वेज मॉडल और साइबर खतरों से उभरते जोखिमों को लेकर भी आगाह किया। उन्होंने कहा कि तकनीक अब समाजों और यहां तक कि चुनावी नतीजों को भी प्रभावित करने में सक्षम हो गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि अराजक तत्वों और एजेंटिक समूहों के हमले पूरे राष्ट्रीय तंत्र को निशाना बना सकते हैं।
इस कारण वित्त मंत्री सीतारमण ने ऐसे संतुलित नियामकीय ढांचे की आवश्यकता पर जोर दिया, जो नवाचार की रक्षा करने के साथ-साथ जोखिमों से भी निपटे। उन्होंने कहा कि उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक के साथ नवाचार को बाधित किए बिना “सॉफ्ट-टच रेगुलेशन” यानी हल्के नियमन को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की है।
यूनिफाइड फिनटेक फोरम को एसआरओ-एफटी ढांचे के तहत स्व-नियामक संगठन के रूप में आरबीआई की मान्यता का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि यह कदम बदलती फिनटेक क्षेत्र की जरूरतों के प्रति केंद्रीय बैंक की समय पर प्रतिक्रिया देने की क्षमता को दर्शाता है।
