मुंबई, 11 सितंबर (आईएएनएस)। भारत की जीडीपी में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सेवा संकल्प अभियान’ और गरबा में प्रवेश को लेकर चल रही बहस पर शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष में होने का मतलब यह नहीं है कि हर मुद्दे पर राजनीति या नकारात्मक टिप्पणी की जाए। दुबे ने ब्रिक्स को भारत के लिए उपयोगी मंच बताते हुए कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों से संवाद, व्यापार और सहयोग के नए अवसर पैदा होते हैं।
समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में आनंद दुबे ने भारत की 7.8 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को आर्थिक विकास के इंजन के रूप में देखा जा रहा है तो यह खुशी की बात है। घरेलू और चुनावी राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष एक-दूसरे पर हमला कर सकते हैं, लेकिन वैश्विक स्तर पर भारत की उपलब्धियों को सकारात्मक नजरिए से देखा जाना चाहिए। दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और तनाव की स्थिति है। ऐसे माहौल में भारत धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है और आर्थिक विकास की दिशा में काम कर रहा है। दुबे ने इसे ‘कछुए की चाल’ बताते हुए कहा कि अंततः कछुआ ही जीतता है।
ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर दुबे ने कहा कि भारत के लिए यह संवाद और सहयोग का महत्वपूर्ण अवसर है। इस मंच पर विभिन्न देशों के नेता आपस में बातचीत करते हैं और व्यापार, पर्यावरण, जलवायु और अन्य वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होती है। विपक्ष में होने का अर्थ यह नहीं है कि ब्रिक्स जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजन की हर बात में राजनीति खोजी जाए। दुबे ने याद दिलाया कि 2012 में भी भारत में ब्रिक्स सम्मेलन हुआ था और कोरोना महामारी के दौरान बैठक वर्चुअल तरीके से आयोजित हुई थी। अब 2026 में भारत में इसका आयोजन होना देश के लिए खुशी की बात है।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित मौजूदगी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जब बड़े देशों के नेता एक साथ बैठेंगे तो बातचीत से कुछ सकारात्मक परिणाम जरूर निकलेंगे।
कांग्रेस नेता शशि थरूर की ओर से ब्रिक्स के फायदे गिनाए जाने पर दुबे ने कहा कि शशि थरूर हों या कोई अन्य नेता, समझदारी वाली बात का स्वागत किया जाना चाहिए। ब्रिक्स पहले पांच देशों का समूह था, जो अब बढ़कर 11 देशों तक पहुंच गया है। भारत, रूस और चीन जैसे बड़े देशों के बीच संवाद और सहयोग का वैश्विक महत्व है। ऐसे मंचों से भारत को कुछ न कुछ हासिल होता है और देश को उसका लाभ उठाना चाहिए। इस दौरान कांग्रेस नेता पी चिदंबरम की आलोचना करते हुए दुबे ने कहा कि उनकी टिप्पणियों को नकारात्मक नजरिए से देखा जाता है। उन्होंने कहा कि देश सकारात्मक ऊर्जा और समझदारी वाली बातों को पसंद करता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से जुड़े ‘सेवा संकल्प अभियान’ पर दुबे ने कहा कि प्रधानमंत्री के रूप में मोदी के प्रति पूरे देश में सम्मान है। उन्होंने उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जन्मदिन या स्मृति दिवस मनाने की अपनी जगह है, लेकिन नेताओं की वास्तविक जिम्मेदारी जनता के बीच रहकर उनके मुद्दों और समस्याओं के लिए काम करना है। जनप्रतिनिधि को 24 घंटे और 365 दिन लोगों की सेवा के लिए उपलब्ध रहने का प्रयास करना चाहिए। ऐसा काम होना चाहिए कि जनता स्वयं लंबे समय तक किसी नेता का जन्मदिन मनाने के लिए प्रेरित हो। लोगों के लिए लगातार काम करने से ही सम्मान हासिल होता है।
गरबा में मुस्लिमों के प्रवेश को लेकर चल रही बहस पर आनंद दुबे ने कहा कि नवरात्रि और गरबा धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति श्रद्धा और सम्मान के साथ कार्यक्रम में शामिल होना चाहता है तो उसका स्वागत होना चाहिए। लेकिन, किसी आयोजन में उपद्रव या हिंसा की कोशिश होने पर पुलिस को कार्रवाई करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सभी समुदायों के लोगों को एक-दूसरे की संस्कृति को समझने और सम्मान देने का अवसर मिलना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक आयोजन में शामिल होने वालों से अनुशासन और आयोजन की परंपराओं का सम्मान अपेक्षित है।
उद्धव ठाकरे के हालिया बयान को लेकर हुए विवाद पर दुबे ने कहा कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि हिंदू और सनातन परंपरा ‘सर्वधर्म संभाव’ और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की बात करती है। दुबे ने कहा कि सनातन को समझने के लिए उसके मूल विचारों और परंपराओं का सम्मान करना जरूरी है। किसी भी धार्मिक आयोजन में यदि कोई व्यक्ति अनुशासन भंग करता है या गलत व्यवहार करता है तो पुलिस कानून के अनुसार कार्रवाई करेगी।
