पटना, 14 सितंबर (आईएएनएस)। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को कहा कि राज्य में बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए सरकार गंभीरता से प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में एक केंद्रीय टीम बिहार आएगी और बाढ़ से उत्पन्न स्थिति एवं क्षति का आकलन करेगी। मुख्यमंत्री ने इस पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताया। मुख्यमंत्री ने यह बात नेहरू पथ स्थित बिहार राज्य अभिलेख भवन के सभागार में आयोजित हिंदी दिवस समारोह-सह-कवि सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि बिहार की नदियां राज्य के जीवन और अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार हैं। इसलिए नदियों को जोड़ने के साथ-साथ उनका संरक्षण भी जरूरी है। नदी तंत्र के संरक्षण, जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ काम किया जा रहा है। सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि बाढ़ से होने वाली जन-धन की क्षति को कम किया जाए और इस समस्या का स्थायी एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित हो।
उन्होंने कहा कि बाढ़ की चुनौती से निपटने के लिए नदी तंत्र और जल प्रबंधन को लेकर व्यापक स्तर पर काम करने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने हिंदी दिवस के अवसर पर राज्यवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि हमारी पहचान, संस्कृति, सभ्यता और समृद्ध साहित्यिक परंपरा की अभिव्यक्ति है। उन्होंने हिंदी के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर प्रयास करने की जरूरत बताई।
उन्होंने कहा कि दुनिया में सर्वाधिक प्रयोग की जाने वाली भाषाओं में हिंदी का महत्वपूर्ण स्थान है और यह विश्व में तीसरी सबसे अधिक प्रयोग की जाने वाली भाषा है। बिहार के साहित्यिक योगदान का उल्लेख करते हुए उन्होंने विद्यापति, राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ और जनकवि नागार्जुन को याद किया। सम्राट चौधरी ने कहा कि हिंदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के मंच से हिंदी में संबोधन कर देश को गौरवान्वित किया। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिंदी में भारत का पक्ष रखने का भी उल्लेख किया और ब्रिक्स सम्मेलन में हिंदी में संदेश देने के लिए उनके प्रति आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंदी के साहित्यिक और सांस्कृतिक विस्तार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बिहार में दो दिवसीय हिंदी साहित्य समागम आयोजित किया जाएगा।
इसमें देशभर के प्रमुख हिंदी साहित्यकारों, रचनाकारों, कवियों और विद्वानों को आमंत्रित किया जाएगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आयोजन की तैयारियां समयबद्ध तरीके से पूरी करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि हिंदी को केवल हिंदी दिवस या सरकारी कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रखना चाहिए। दैनिक जीवन और कार्यक्षेत्र में इसके अधिक से अधिक प्रयोग से भाषा मजबूत होगी।
उन्होंने आधुनिक तकनीक के माध्यम से हिंदी के प्रचार-प्रसार और इसे वैश्विक पहचान दिलाने के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव और मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने भी संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने राजभाषा पत्रिका का लोकार्पण किया। इस अवसर पर वरिष्ठ अधिकारी, साहित्यकार, कवि, विद्वान, गणमान्य व्यक्ति और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
