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पुणे में गोविंद देव गिरी महाराज ने युवाओं को दिया आत्मसंयम का संदेश, डीजे मुक्त गणेशोत्सव का किया समर्थन

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पुणे, 14 सितंबर (आईएएनएस)। गणेशोत्सव के अवसर पर पुणे के श्रीमंत भाऊसाहेब रंगारी गणपति मंडल में पहुंचे संत गोविंद देव गिरी महाराज ने गणपति बप्पा के दर्शन और पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने युवाओं को आत्मसंयम, माता-पिता के सम्मान और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का संदेश दिया। साथ ही उन्होंने डीजे-मुक्त गणेशोत्सव के निर्णय का समर्थन करते हुए पारंपरिक भारतीय वाद्ययंत्रों के उपयोग को बढ़ावा देने की अपील की।

गोविंद देव गिरी महाराज ने कहा कि यदि युवाओं को देश का निर्माण करना है और भविष्य में नेतृत्व की भूमिका निभानी है, तो सबसे पहले उन्हें आत्मविजय की साधना करनी होगी। व्यक्ति को अपने ऊपर नियंत्रण रखना सीखना चाहिए।

डीजे मुक्त गणेशोत्सव पर उन्होंने कहा कि जानकारी मिली है कि पुणे के युवाओं ने गणेशोत्सव में डीजे के बजाय पारंपरिक वाद्ययंत्रों के उपयोग का संकल्प लिया है। इसके लिए उन्होंने युवाओं की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी।

उन्होंने कहा कि पुणे ऐसा शहर है जिसने पूरे देश को समय-समय पर प्रेरणा दी है। यह पुरुषार्थ और प्रभावी नेतृत्व की भूमि रही है। देश के भविष्य के निर्माण की जिम्मेदारी युवाओं के कंधों पर होती है और उन्हें अपने आचरण एवं संस्कारों से समाज को नई दिशा देनी चाहिए।

युवाओं को संदेश देते हुए गोविंद देव गिरी महाराज ने भगवान गणेश के जीवन का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि गणपति ने अपने माता-पिता की परिक्रमा कर पृथ्वी की परिक्रमा के बराबर पुण्य प्राप्त किया था। इसलिए हर युवक और युवती को यह संकल्प लेना चाहिए कि उसके किसी भी व्यवहार से माता-पिता की आंखों में आंसू न आएं और उन्हें कभी शर्मिंदगी का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि युवाओं का कर्तव्य है कि वे अपने माता-पिता का सम्मान करें और यथासंभव उनकी सेवा करें।

गणेशोत्सव में डीजे के उपयोग को लेकर उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारतीय समाज को विदेशों की परंपराओं का अंधानुकरण नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय वाद्ययंत्र मंगल और शुभ अवसरों के प्रतीक हैं तथा हमारी सांस्कृतिक परंपराओं के अनुरूप हैं। वहीं, डीजे भारतीय परंपरा और संस्कृति के साथ सामंजस्य नहीं रखता। उन्होंने गणेशोत्सव में ढोल-ताशा और अन्य पारंपरिक वाद्यों के उपयोग को बढ़ावा देने की अपील की।