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आतंकियों को जी, देशभक्तों को छी कहना कांग्रेस की मानसिकता : विहिप प्रवक्ता विनोद बंसल

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नई दिल्ली, 15 सितंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद द्वारा जेल में बंद जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद को राष्ट्रवादी बताए जाने के बाद राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के प्रवक्ता विनोद बंसल ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘आतंकियों को जी और देशभक्तों को छी’ कहना कांग्रेस की मानसिकता बन चुकी है।

नई दिल्ली में आईएएनएस से बातचीत में विनोद बंसल ने कहा कि कांग्रेस नेताओं के बयानों से उनकी पार्टी की मानसिकता बार-बार सामने आती है। कांग्रेस के कई नेताओं के बयान सनातन विरोधी, भारत विरोधी और तुष्टीकरण की राजनीति से प्रेरित दिखाई देते हैं। इनके बयानों से आतंकी और पाकिस्तान प्रेमी मानसिकता बार-बार बाहर आती है। कभी कोई नेता कुछ बोलता है, तो कभी कोई नेता कुछ बोलता है। इनके बयान तो इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में भी पाकिस्तान के पक्ष और भारत के विरोध में उद्धृत किए जाते हैं। कांग्रेस के नेताओं के बयानों के कारण पार्टी की छवि देश विरोधी के रूप में स्वयं परिलक्षित होती है। बी.के. हरिप्रसाद की यह अकेले गलती नहीं है। वे तो सिर्फ प्रदेश अध्यक्ष हैं। सोनिया गांधी को तो स्वयं किसी आतंकी के मारे जाने पर रात भर नींद नहीं आती थी।

उन्होंने कहा कि बहुत हुआ देश विरोध अब कांग्रेस को आत्मचिंतन करने की जरूरत है।

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के यूसीसी पर दिए बयान पर विनोद बंसल ने कहा कि संविधान की किताब लेकर संविधान- संविधान चिल्लाते हैं। इसलिए इनको भड़काऊ भाईजान कहते हैं। एनआरसी का नाम तो किसी ने लिया नहीं, न गृह मंत्री ने लिया और न किसी और ने लिया, लेकिन, इसे लेकर भड़काएंगे। जब सीएए आया था, उसमें किसी मुसलमान की नागरिकता छीनने की बात थी क्या? किसी की नागरिकता छीनी गई क्या? लेकिन इन लोगों ने देशभर में आग लगाने का काम किया।

उन्होंने कहा कि यह लोग लगातार भारत को जलाने, बरगलाने, भड़काने और देश विरोधी आतंकियों के अड्डे चलाने के लिए प्रेरित करती हैं। पांच राज्यों में यूसीसी पारित हो चुका है और दो राज्यों में लागू है। उत्तराखंड में इसे लागू हुए एक साल का समय हो गया है। क्या वहां मुसलमानों के अधिकार छीने गए? क्या वहां मुस्लिम संगठनों ने इसका विरोध किया? उन्होंने कहा कि झूठ के आधार पर सीएए के नाम पर दिल्ली को जलाया गया। जनता सब कुछ जानती है।