कोझिकोड, 15 सितंबर (आईएएनएस)। केरल यूनिट में संगठनात्मक संकट के बाद सीपीआई-एम पोलित ब्यूरो ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य नेतृत्व में बड़े पैमाने पर फेरबदल का आदेश दिया है। यह कदम चुनावी हार और संगठनात्मक कमियों को लेकर बढ़ती आलोचना के बाद उठाया गया है।
एक अहम कदम के तहत, राज्य सचिवालय का पुनर्गठन किया गया है। इसमें वरिष्ठ नेता पी. जयराजन और पूर्व मंत्री वी. शिवनकुट्टी और एम.बी. राजेश को शामिल किया गया है, जबकि टी.पी. रामकृष्णन और थॉमस इसाक को हटा दिया गया है।
यह बड़ा फैसला कोझिकोड में तीन दिन तक चली राज्य समिति की बैठक के आखिरी दिन लिया गया। इस बैठक में पार्टी की चुनावी हार और संगठन के कमजोर होने को रोकने में नाकामी को लेकर राज्य नेतृत्व की कड़ी आलोचना हुई थी।
राज्य समिति का भी पुनर्गठन किया गया और इसमें नौ नए सदस्य शामिल किए गए, जिनमें ओ.एस. अंबिका, एम. विजिन, जैक सी. थॉमस और पी.एस. संजीव शामिल हैं। इससे संगठन के ढांचे में युवा चेहरों को लाने की कोशिश का संकेत मिलता है।
ये बदलाव इसलिए भी अहम हैं क्योंकि ऐसी खबरें हैं कि राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन के कामकाज और कुछ सार्वजनिक बयानों की आलोचना के बाद पार्टी ने उन्हें फटकार लगाई थी।
खबरों के मुताबिक, कई प्रतिनिधियों ने तर्क दिया कि राज्य सचिव जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं से दूर हो गए हैं और उनके कुछ बयानों व मीडिया से निपटने के तरीके ने पार्टी को राजनीतिक हमलों के प्रति कमजोर बना दिया है।
आलोचना सिर्फ व्यक्तिगत गलतियों तक सीमित नहीं थी।
प्रतिनिधियों ने पार्टी संगठन पर सरकार के बढ़ते दबदबे और पार्टी की पारंपरिक जमीनी मशीनरी के कमजोर होने की ओर इशारा किया।
उन्होंने तर्क दिया कि चुनावी हार के लिए पूरी तरह से शासन की कमियों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता; संगठन की निष्क्रियता और पार्टी कार्यकर्ताओं का भरोसा व उत्साह बनाए रखने में विफलता की भी समीक्षा की जानी चाहिए।
राज्य सचिवालय में पी. जयराजन की वापसी खास तौर पर अहम है।
वे कन्नूर के एक प्रमुख नेता हैं और पार्टी की पारंपरिक संगठनात्मक शैली से जुड़े रहे हैं। उनके इस पद पर आने से पार्टी के अंदरूनी समीकरणों पर असर पड़ने की उम्मीद है।
शिवनकुट्टी के शामिल होने से दक्षिणी जिलों का प्रतिनिधित्व मजबूत होता है, जबकि राजेश के आने से शीर्ष निर्णय लेने वाली संस्था में एक युवा और अच्छी तरह से बात रखने वाला नेतृत्व चेहरा शामिल होता है।
इस पुनर्गठन को पार्टी के भीतर अलग-अलग वर्गों को साथ लाने और साथ ही पीढ़ीगत बदलाव का संकेत देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
यह संगठनात्मक चुनावों से ठीक पहले हो रहा है, जिससे जमीनी स्तर से ऊपर तक पार्टी के पुनर्निर्माण के लिए ये बदलाव अहम हो सकते हैं। इस तरह कोझिकोड की बैठक केरल में सीपीआई-एम के लिए एक अहम मोड़ साबित हुई है। पोलित ब्यूरो के समर्थन से किए गए बदलाव साफ तौर पर दिखाते हैं कि नेतृत्व अब संगठनात्मक संकट को नजरअंदाज करने के मूड में नहीं है।
