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सेवा से संकल्प अभियान: राजनाथ सिंह ने गिनाईं मोदी सरकार की उपलब्धियां

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नई दिल्ली, 16 सितंबर (आईएएनएस) आज भारत दुनिया के 100 से ज्यादा देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सिस्टम में बदलाव और गुड गवर्नेंस के उदाहरण रक्षा क्षेत्र में देखे जा सकते हैं। 2014 की तुलना में रक्षा निर्यात में 56 गुना वृद्धि हुई है। रक्षा उपकरणों के उत्पादन में 4 गुना वृद्धि हुई है और यह लगभग 1.80 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ‘सेवा से संकल्प अभियान’ पर आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन और सरकार के प्रमुख के रूप में उनके 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा 2014 से पहले भी भारत के पास मैनपॉवर और ब्रैन पावर दोनों थे, लेकिन अच्छे नेतृत्व की कमी से यह शक्ति अपनी पूरी क्षमता पर काम नहीं कर रही थी। पीएम मोदी ने इन दोनों शक्तियों को पूरी क्षमता से काम करने के लिए एक इकोसिस्टम दिया है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इस वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिवस इसलिए खास है, क्योंकि उनके जन्मदिन के बीस दिन बाद, यानी 7 अक्टूबर को वे सरकार के प्रमुख के रूप में 25 वर्ष पूरे करेंगे। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शुरू हुई उनकी सेवा यात्रा को 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब यूपीआई की शुरुआत की गई तो बहुत लोगों को लग रहा था कि यह पहल सफल नहीं होगी। पिछले महीने ही यूपीआई को 10 साल पूरे हुए हैं। सिर्फ अगस्त महीने में यूपीआई से 23.66 अरब लेनदेन हुए, जिनकी कीमत 29.88 लाख करोड़ रुपए रही। यह अपने आप में एक रिकॉर्ड है।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने यूपीआई की तारीफ करते हुए कहा था कि यूपीआई केवल तकनीकी कहानी नहीं है, बल्कि यह एक सभ्यतागत कहानी है। यूपीआई अब दुनिया के कई देशों में सक्रिय है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि यह गर्व की बात है कि इस वर्ष पहली बार स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से ‘वंदे मातरम्’ के सभी छह अंतरे गाए गए हैं। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के जीवन के पिछले 25 वर्षों को अगर एक शब्द में समेटना हो तो वह शब्द है ‘सेवा’। पद बदला, दायित्व बढ़ा, भूमिका बदली, चुनौतियां बढ़ीं। लेकिन उनके जीवन का ‘सेवा पहले, स्वयं बाद में’ का मूल भाव नहीं बदला।

राजनाथ सिंह ने कहा कि एक अच्छा नेता वह नहीं होता है जो सिर्फ सरकार बनाने पर ध्यान केंद्रित करे, बल्कि वह होता है जो लोगों का भविष्य बेहतर करने पर अपना ध्यान केंद्रित करे। एक अच्छा नेता चुनावी जीत के लिए लोकलुभावन फैसले नहीं लेता, बल्कि मतदाताओं के जीवन को बेहतर करने के लिए साहसिक और दूरगामी फैसले लेता है। बड़े बदलाव के लिए अच्छी नीति के साथ राजनीतिक इच्छाशक्ति भी चाहिए। जनादेश के साथ अपने विश्वास पर दृढ़ रहने का साहस भी चाहिए।

राजनाथ सिंह का कहना था कि बड़े दृष्टिकोण के साथ अच्छा क्रियान्वयन भी चाहिए। आज के विरोध से विचलित न होकर बेहतर कल के लिए फैसले लेने की क्षमता भी होनी चाहिए। पीएम मोदी ने हमेशा इसी दृष्टिकोण, इच्छाशक्ति, दृढ़ विश्वास, साहस और व्यापक उद्देश्य के साथ काम किया है। प्रधानमंत्री बनने के बाद भी नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वही दृढ़ता, निर्भीकता, इच्छाशक्ति और दूरदर्शिता दिखती है, जो गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में दिखती थी।

उन्होंने कहा कि जो बैंक कभी खराब ऋण के बोझ तले दबे हुए थे, आज वही मजबूत वित्तीय स्थिति के साथ देश की आर्थिक वृद्धि को गति दे रहे हैं। इसी तरह पीएम मोदी के दृष्टिकोण की बात करें तो ‘स्वच्छ भारत मिशन’ को ही देख लीजिए। इसका फायदा सिर्फ इतना नहीं हुआ कि देश में शौचालय बने, सफाई बढ़ी और खुले में शौच समाप्त हुआ।

राजनाथ सिंह ने कहा कि 2014 के बाद नौ राज्यों में पहली बार भाजपा के मुख्यमंत्री बने हैं। आज 20 से अधिक राज्यों में हमारी सरकार है। जनता लगातार और बार-बार मोदी के नेतृत्व को स्वीकार भी कर रही है और समर्थन भी दे रही है। ‘सेवा से संकल्प अभियान’ पर उन्होंने कहा कि यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग को सेवा, सहयोग और जनभागीदारी से जोड़ने का एक दृढ़ संकल्प है। आज देशभर में 12 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण हो चुका है। गरीब परिवारों के लिए 4 करोड़ से अधिक पक्के घरों का निर्माण कराया गया है।

उन्होंने कहा कि देश में आज काम करने की संस्कृति ही बदल गई है। मोदी जी का स्पष्ट मानना है कि ‘अनुमति मिलने तक प्रतिबंधित’ की सोच को समाप्त करके ‘प्रतिबंधित होने तक अनुमत’ की सोच से काम करना है। रक्षा मंत्री ने कहा कि क्या आप 2014 से पहले यह कल्पना कर सकते थे कि निजी क्षेत्र की कोई कंपनी भारत में अपना उपग्रह प्रक्षेपित कर पाए। या निजी क्षेत्र का कोई संगठन अपना रॉकेट प्रक्षेपित कर पाए। या परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में निजी भागीदारी हो। आज यह सब संभव हुआ है।