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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ‘विश्व रोगी सुरक्षा दिवस 2026’ मनाया, एनसीडी देखभाल पर ध्यान केंद्रित किया

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नई दिल्ली, 18 सितंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से ‘गैर-संचारी रोगों के लिए सुरक्षित देखभाल’ थीम के साथ ‘विश्व रोगी सुरक्षा दिवस 2026’ मनाया गया। इस राष्ट्रीय आयोजन का मुख्य उद्देश्य एनसीडी देखभाल की पूरी प्रक्रिया के दौरान रोगी की सुरक्षा और देखभाल की गुणवत्ता को बेहतर बनाना था।

सभा को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव और मिशन निदेशक आराधना पटनायक ने मरीजों की सुरक्षा को मजबूत करने, देखभाल की गुणवत्ता में सुधार करने और पूरे देश में सुरक्षित स्वास्थ्य प्रणालियां बनाने के लिए भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मरीजों की सुरक्षा केवल किसी एक कार्यक्रम या विभाग की जिम्मेदारी नहीं हो सकती बल्कि इसे पूरी स्वास्थ्य प्रणाली में शामिल करने की जरूरत है, खासकर गैर-संचारी रोगों की रोकथाम, निदान, उपचार और लंबे समय तक प्रबंधन के लिए।

एनसीडी के बढ़ते बोझ का जिक्र करते हुए आराधना पटनायक ने बताया कि भारत में होने वाली कुल मौतों में से लगभग 63 प्रतिशत मौतें एनसीडी के कारण होती हैं, जिससे मरीजों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा वितरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाती है। सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा में हाल की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि एनएफएचएस-6 के अनुसार, 96 प्रतिशत टीकाकरण और 90.6 प्रतिशत संस्थागत प्रसव सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के माध्यम से किए जा रहे हैं। उन्होंने स्वास्थ्य सेवा संस्थानों में गुणवत्ता और सुरक्षा प्रथाओं को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया, खासकर मरीजों के रेफरल और देखभाल की निरंतरता के मामले में, ताकि सही सेवाओं तक समय पर पहुंच और बेहतर स्वास्थ्य परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से गुणवत्ता सुधार के प्रयासों में तेजी लाने का आह्वान करते हुए आराधना पटनायक ने मार्च 2027 तक आयुष्मान आरोग्य मंदिर–उप स्वास्थ्य केंद्रों (एएएम-एसएचसी) के लिए 100 प्रतिशत एनक्यूएएस सर्टिफिकेशन और उसके बाद आयुष्मान आरोग्य मंदिर–प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (एएएम-पीएचसी) के सर्टिफिकेशन को हासिल करने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप और कार्य योजना की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि देखभाल के सभी स्तरों पर मरीजों की सुरक्षा की संस्कृति को संस्थागत बनाने के लिए गुणवत्ता आश्वासन के प्रति एक संरचित और समयबद्ध दृष्टिकोण महत्वपूर्ण होगा।

उद्घाटन सत्र का समापन ‘राष्ट्रीय रोगी सुरक्षा शपथ’ के साथ हुआ, जिसमें देश भर में सुरक्षित देखभाल सुनिश्चित करने और स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए स्वास्थ्य सेवा से जुड़े सभी लोगों की सामूहिक प्रतिबद्धता को दोहराया गया।

इसके बाद तकनीकी कार्यक्रम में “गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) के लिए सुरक्षित देखभाल” पर एक खास सेमिनार आयोजित किया गया। इसमें जाने-माने विशेषज्ञों ने एनसीडी देखभाल के दौरान रोगी सुरक्षा से जुड़ी मुख्य चुनौतियों और तरीकों पर चर्चा की। चर्चाओं में एनसीडी देखभाल में नुकसान के बोझ, एनसीडी सेवाओं में रोगी सुरक्षा को मजबूत करने, रोगी सुरक्षा के लिए डिजिटल स्वास्थ्य का लाभ उठाने, को-मॉर्बिडिटी (एक साथ कई बीमारियों का होना) पर ध्यान देते हुए क्लीनिकल प्रक्रियाओं में सुरक्षित एनसीडी देखभाल सुनिश्चित करने और एनसीडी देखभाल में दवा सुरक्षा को बढ़ावा देने जैसे विषयों को शामिल किया गया।

इसके बाद कार्यक्रम का ध्यान राज्यों में रोगी सुरक्षा को लागू करने और गुणवत्ता सुधार की पहलों पर चर्चा के माध्यम से नीति को असल में लागू करने पर केंद्रित रहा। प्रतिभागियों ने राज्यों की ओर से किए गए नवाचारों और बेहतरीन तरीकों को साझा किया, जिनमें झारखंड का व्यापक बुजुर्ग मधुमेह और उच्च रक्तचाप जांच मॉडल, एनसीडी की रोकथाम और नियंत्रण के लिए केरल की ‘हृदयारागम्’ पहल और राजस्थान का एसईटीयू ऑनलाइन रेफरल एप्लिकेशन शामिल हैं। इन अनुभवों ने स्वास्थ्य सेवा के विभिन्न स्तरों पर रोगी सुरक्षा को मजबूत करने के लिए स्थिति के अनुसार तरीकों, ज्ञान साझा करने और प्रभावी तौर-तरीकों को अपनाने के महत्व को उजागर किया।

विश्व स्वास्थ्य सभा की ओर से अपनाए जाने के बाद हर साल 17 सितंबर को मनाया जाने वाला ‘विश्व मरीज सुरक्षा दिवस’, सुरक्षित हेल्थकेयर के लिए जागरूकता और कार्रवाई को बढ़ावा देने का एक वैश्विक मंच है। 2026 की थीम, “गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) के लिए सुरक्षित देखभाल,” ने एनसीडी देखभाल के पूरे क्रम में नुकसान को रोकने के महत्व पर जोर दिया।