बेंगलुरु, 22 सितंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा का पेपर लीक होने की जांच कर रही पुलिस का कहना है कि उन्हें बैंक ट्रांसफर के ज़रिए करीब 92 लाख रुपये और उम्मीदवारों द्वारा नकद दिए गए 60 लाख रुपये का पता चला है।
पूर्व एग्जाम कंट्रोलर और आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को 29 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद 31 अगस्त को बिचौलिये बसवराज कन्नाले को गिरफ़्तार किया गया। पूछताछ किए गए 40 उम्मीदवारों में से 29 को आरोपी बनाया गया है।
पुलिस का आरोप है कि उम्मीदवारों को हर पेपर के लिए 60 से 80 सवाल दिए गए और देवनहल्ली के पास तीन विला में उन्हें कोचिंग दी गई। अधिकतर पैसा ओम लक्ष्मी सौहार्द सहकारी बैंक, तिलकवाड़ी और कोटक महिंद्रा बैंक के एक अकाउंट के जरिए लेन-देन किया गया।
जांचकर्ताओं का आरोप है कि इस पैसे में से 22 लाख रुपये से गंगवार के एक दोस्त के लिए हीरे का हार खरीदा गया था। अकाउंट में मौजूद करीब 1.40 करोड़ रुपये फ्रीज कर दिए गए हैं और 5.76 लाख रुपये नकद जब्त किए गए हैं। केपीएससी के पूर्व प्रमुख शिवशंकरप्पा साहूकार, पूर्व सदस्य शांता होसामनी और बैंक के पदाधिकारियों के खिलाफ लुक-आउट सर्कुलर जारी किए गए हैं। साहूकार, कन्नाले और संदिग्ध उम्मीदवारों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई। गंगवार की जमानत पर आज यानी मंगलवार को सुनवाई होनी है।
दरअसल, 8 जनवरी 2026 को 400 वेटरनरी ऑफिसर पदों के लिए परीक्षा हुई थी। 17 जुलाई को जब फाइनल चयन सूची जारी हुई तो तुरंत विवाद शुरू हो गया। आरोप लगा कि बिचौलियों के जरिए 80 लाख से 1 करोड़ रुपए में सीटें बेची जा रही हैं। इसके बाद राज्यभर में विरोध प्रदर्शन हुए और मामला तूल पकड़ गया। विवाद बढ़ने पर केपीएससी ने चयन सूची रोक दी। कर्नाटक सरकार ने सीआईडी को जांच सौंपी। सीआईडी ने इस मामले में कई एफआईआर दर्ज कीं और कुछ बिचौलियों को गिरफ्तार भी किया।
