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कर्नाटक: सूखा प्रभावित लिस्ट में इंडी और चडचन तालुकों को शामिल न करने पर कांग्रेस विधायक का इस्तीफा

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बेंगलुरु, 23 सितंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के विजयपुरा जिले के इंडी और चडचन तालुकों को सूखा प्रभावित क्षेत्रों की लिस्ट में शामिल नहीं किए जाने के विरोध में इंडी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक यशवंतरायगौड़ा पाटिल ने बुधवार को कर्नाटक विधानसभा से अपना इस्तीफा सौंप दिया।

उनके इस्तीफे को लेकर विधानसभा में राजनीतिक हंगामा हुआ। विपक्षी भाजपा ने यह मुद्दा उठाया और विधानसभा अध्यक्ष से इस्तीफे की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

पाटिल ने विधानसभा अध्यक्ष जीएस पाटिल को अपना इस्तीफा सौंपा और मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को भी अपने फैसले की जानकारी दी। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से विधायक को इस्तीफा वापस लेने के लिए मनाने की कोशिश की जा रही थी।

पाटिल ने कहा कि उन्होंने सरकार से कई बार इंडी और चडचन को सूखा प्रभावित क्षेत्रों की सूची में शामिल करने की अपील की थी, लेकिन उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया।

पाटिल ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, ”अब हमारी बातों और भावनाओं को कोई महत्व नहीं दिया जा रहा है।”

पाटिल का इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब राज्य में सूखा प्रभावित तालुकों की घोषणा को लेकर कांग्रेस विधायकों के एक वर्ग में असंतोष बना हुआ है।

इससे पहले हाल में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में मंत्री पद नहीं मिलने पर भी पाटिल ने नाराजगी जताई थी। उस समय उन्होंने कहा था कि ईमानदार और पार्टी के प्रति वफादार कार्यकर्ताओं को अब महत्व नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें मंत्री पद देने का भरोसा दिया गया था, लेकिन यह वादा पूरा नहीं किया गया।

बाद में मुख्यमंत्री शिवकुमार और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के प्रयासों के बाद पाटिल ने अपना पिछला इस्तीफा वापस ले लिया था और विधायक पद पर बने रहे थे।

इस बार उनके इस्तीफे की वजह सरकार का इंडी और चडचन को सूखा प्रभावित तालुकों की सूची में शामिल नहीं करने का फैसला है।

कर्नाटक में अब तक केंद्र सरकार द्वारा 2020 में तैयार किए गए सूखा घोषणा संबंधी दिशा-निर्देशों के तहत चार चरणों में 188 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है।

पहले चरण में 101 तालुक, दूसरे चरण में 23, तीसरे चरण में 53 और चौथे चरण में 11 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया।

पाटिल के इस्तीफे के बाद विधानसभा में तीखी बहस हुई। पूर्व गृह मंत्री और भाजपा विधायक अरागा ज्ञानेंद्र ने यह मुद्दा उठाया और विधानसभा अध्यक्ष से इस्तीफे की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

चर्चा के दौरान ज्ञानेंद्र और स्वास्थ्य मंत्री यूटी खादर के बीच भी बहस हुई। ज्ञानेंद्र ने सवाल किया कि जब इस्तीफा मौजूदा विधानसभा अध्यक्ष को दिया गया है तो खादर इस मामले में हस्तक्षेप क्यों कर रहे हैं।

विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक ने भी मामले में हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा कि वह मौजूदा विधायक के इस्तीफे के मुद्दे पर विपक्ष के नेता के तौर पर बोल रहे हैं।

अशोक ने कहा कि भाजपा के पास पाटिल के इस्तीफे की एक प्रति है। उन्होंने मुख्यमंत्री शिवकुमार के उस पुराने बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि विधायकों की ओर से दिए गए इस्तीफे स्वीकार किए जाएंगे।

अशोक ने सरकार को चुनौती देते हुए कहा, ”क्या अब इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है? अगर ऐसा है तो क्या डीके शिवकुमार की बात की कोई अहमियत है? अगर हिम्मत है तो इस्तीफा स्वीकार कीजिए।”

विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि भाजपा को घबराने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि पाटिल का इस्तीफा उनके विधानसभा क्षेत्र के लोगों की समस्याओं से जुड़ा है।

मुख्यमंत्री ने कहा, ”यह लोगों की रोजी-रोटी के लिए दिया गया इस्तीफा है। प्रधानमंत्री ने भी हमें सूखे की स्थिति को लेकर चेतावनी दी है।”

उन्होंने कहा कि पाटिल दबाव में थे, क्योंकि उनके निर्वाचन क्षेत्र के किसानों ने कर्ज लेकर खेती में पैसा लगाया है।

शिवकुमार ने कहा कि किसी तालुक को सूखा प्रभावित घोषित करने के लिए पहले से तय दिशा-निर्देश हैं और सरकार अपनी मर्जी से किसी क्षेत्र को सूखा प्रभावित घोषित नहीं कर सकती।

उन्होंने कहा, ”किसी क्षेत्र को सूखा प्रभावित घोषित करने के लिए दिशा-निर्देश हैं। सरकार अचानक ऐसी घोषणा नहीं कर सकती।” मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने पाटिल से बातचीत की और उन्हें समझाने की कोशिश की।

शिवकुमार ने कहा, ”वह मेरे पास आए थे और मैंने उन्हें समझाया। यह पूर्व भाजपा नेता केएस ईश्वरप्पा या पूर्व मंत्री बी नागेंद्र की ओर से दिए गए इस्तीफों जैसा नहीं है। यह लोगों की रोजी-रोटी के लिए दिया गया इस्तीफा है।”

उन्होंने कहा कि एचके पाटिल जैसे वरिष्ठ नेता भी सूखे की स्थिति को लेकर दबाव में हैं। ऐसे में यशवंतरायगौड़ा पाटिल पर अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों का दबाव होना असामान्य बात नहीं है।

हालांकि, बाद में विधानसभा अध्यक्ष जीएस पाटिल ने स्पष्ट किया कि उन्होंने इंडी विधायक की ओर से दिया गया इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है।

अध्यक्ष ने कहा कि इस्तीफा निर्धारित नियमों के मुताबिक नहीं है, इसलिए इसे स्वीकार नहीं किया गया।

इस पूरे घटनाक्रम ने सूखे की स्थिति से निपटने के सरकार के तरीके को लेकर सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर असंतोष को और सामने ला दिया है। वहीं, विधायक का इस्तीफा विधानसभा में चर्चा का एक बड़ा मुद्दा बन गया है।