बेंगलुरु, 24 सितंबर (आईएएनएस)। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने गुरुवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तुरंत इस्तीफे की मांग की। साथ ही, लोकतंत्र और हर नागरिक के वोट देने के अधिकार की रक्षा के लिए उन्होंने चल रही ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (एसआईआर) प्रक्रिया को रद्द करने और चुनावी डेटा का नए सिरे से रिविजन करने की मांग की।
बेंगलुरु में मीडिया से बात करते हुए सीएम शिवकुमार ने कहा, “वोट देने का अधिकार जीने का अधिकार है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने देश के लोगों के वोटिंग अधिकारों के बचाव में आवाज उठाई है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि आम नागरिकों के वोटिंग अधिकारों का राजनीतिक मकसद के लिए गलत इस्तेमाल करने की कोशिशें की जा रही हैं।
उन्होंने कहा, “पश्चिम बंगाल, बिहार और कई अन्य राज्यों में भी ऐसी कोशिशें की गई हैं। अब वे कर्नाटक समेत हर जगह ऐसा करने की कोशिश कर रहे हैं। मैंने कल चुनाव आयोग से और समय देने का अनुरोध भी किया था।”
चुनाव आयोग के सदस्यों के बीच मतभेदों का जिक्र करते हुए, सीएम शिवकुमार ने दावा किया कि चुनाव आयोग को दी गई स्वायत्तता का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “जब ज्यादातर सदस्य किसी राय से सहमत नहीं होते, तो एकतरफा फैसला नहीं थोपा जा सकता। बेहतर होगा कि मुख्य चुनाव आयुक्त नैतिक आधार पर खुद इस्तीफा दे दें।”
मुख्यमंत्री ने मांग की कि चल रही एसआईआर प्रक्रिया को रद्द किया जाए और नई प्रक्रिया शुरू की जाए। उन्होंने कहा, “हम कांग्रेस के वोटों या भाजपा के वोटों की बात नहीं कर रहे हैं। हर नागरिक को वोट देने का अधिकार है, और यह जीने का अधिकार है। कोई भी उस अधिकार को दबा नहीं सकता।”
वोटर लिस्ट में सुधार की प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 6, 7 और 8 का जिक्र करते हुए, सीएम शिवकुमार ने मौजूदा प्रक्रिया के तरीके पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि इससे समाज के अनपढ़ और वंचित वर्गों पर खास तौर पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ राय का मामला नहीं है। यह एक मौलिक अधिकार है। यह आम आदमी की आवाज है।”
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर संसद समेत बड़े मंच पर बहस होनी चाहिए, और चुनाव आयोग के नाम पर अलग-अलग राज्यों में अधिकारियों पर किसी भी तरह के दबाव या डराने-धमकाने का विरोध किया।
सीएम शिवकुमार ने कहा, “हम चाहते हैं कि नई एसआईआर प्रक्रिया हो। सभी को उनके अधिकार मिलने चाहिए। हर वोट के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए स्थिति की व्यापक समीक्षा की जानी चाहिए और चुनावी डेटा की फिर से जांच होनी चाहिए।”
