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जोधपुर एम्स के रेजिडेंट डॉक्टर की मौत पर विरोध-प्रदर्शन; ओपीडी सेवाएं प्रभावित, जांच समिति गठित

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जयपुर, 24 सितंबर (आईएएनएस)। जोधपुर एम्स में एनेस्थीसिया विभाग के 29 वर्षीय रेजिडेंट डॉक्टर रामनरेश यादव की मौत के बाद तनाव बना हुआ है। रेजिडेंट डॉक्टरों और अन्य मेडिकल स्टाफ ने विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया है, जिससे ओपीडी सेवाएं बाधित हुई हैं और खबरों के अनुसार सर्जरी व अन्य मेडिकल सेवाओं पर भी असर पड़ा है।

एम्स प्रशासन ओपीडी सेवाओं में रुकावट के बारे में मरीजों को बताने के लिए कैंपस के पब्लिक-एड्रेस सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा था। प्रदर्शनकारियों ने रास्ते में व्हीलचेयर और स्ट्रेचर रखकर एक एंट्री गेट को भी ब्लॉक कर दिया।

मंगलवार को ड्यूटी के दौरान डॉ. रामनरेश यादव की मौत हो गई। उनकी मौत के बाद रेजिडेंट डॉक्टरों ने बुधवार देर रात कैंपस में कैंडल लाइट मार्च निकाला, अपने साथी को श्रद्धांजलि दी और उनकी मौत के हालात की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की।

एम्स प्रशासन ने डीन (एकेडमिक) की अध्यक्षता में एक आंतरिक जांच समिति बनाई है। पुलिस इस मामले की अलग से जांच कर रही है।

रेजिडेंट डॉक्टरों की शिकायतों और चिंताओं को दूर करने के लिए एक और समिति बनाई गई है। इन उपायों के बावजूद विरोध प्रदर्शन जारी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, डॉ. यादव मंगलवार को ड्यूटी के दौरान अचानक ऑपरेशन थिएटर (ओटी) से चले गए। दोपहर 1 बजे वे एम्स के रेस्टरूम के बाथरूम में बेहोश पाए गए। साथी डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत प्राथमिक उपचार देने की कोशिश की लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

पुलिस को सूचना दी गई और बाद में शव को एम्स की मोर्चरी ले जाया गया। उनके परिवार को भी सूचित किया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटनास्थल पर एक इंजेक्शन और एक सिरिंज मिली। इससे ड्रग ओवरडोज की शुरुआती आशंका जताई जा रही है लेकिन मौत का सही कारण अभी पता नहीं चला है।

मौत के हालात का पता चल रही जांच और संबंधित मेडिकल जांच से चलेगा। डॉ. रामनरेश यादव मूल रूप से अलवर के बड़ा जोड़ इलाके के रहने वाले थे। उन्होंने एम्स जोधपुर से एमबीबीएस पूरा किया था और उसी संस्थान से एनेस्थीसिया में पोस्टग्रेजुएट की पढ़ाई कर रहे थे।

बताया जाता है कि उनके बड़े भाई एम्स दिल्ली में डॉक्टर हैं जबकि उनके पिता उनके पैतृक गांव में रहते हैं।

उनकी मौत से साथी डॉक्टरों और रेजिडेंट मेडिकल स्टाफ में दुख और गुस्सा है। रेजिडेंट डॉक्टरों ने उनकी मौत के हालात की निष्पक्ष जांच की मांग की है। प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों ने व्यापक जांच और किसी व्यक्ति या संस्थान की जिम्मेदारी तय होने पर कार्रवाई की मांग की है। सोशल मीडिया पर मृतक डॉक्टर के परिवार के लिए 5 करोड़ रुपए के मुआवजे की मांग भी की जा रही है।

सोशल मीडिया पर एक रेजिडेंट डॉक्टर का भावुक वीडियो भी वायरल हुआ है। वीडियो में डॉक्टर अपने साथी, रेजिडेंट्स, फैकल्टी सदस्यों और शिक्षकों से एकजुट होने और इस घटना के खिलाफ आवाज उठाने की अपील कर रहे हैं। वे इस मौत पर दी गई प्रतिक्रिया पर सवाल उठाते हैं और रेजिडेंट डॉक्टरों की लंबी ड्यूटी और काम के दबाव से जुड़ी चिंताओं को उजागर करते हैं। उनका कहना है कि कुछ डॉक्टर डर के कारण चुप रहते हैं और वे अपने साथियों से एकजुट होकर आगे आने की अपील करते हैं।

डॉक्टर यह भी मानते हैं कि हालात की जानकारी होने के बावजूद उन्होंने तुरंत आवाज नहीं उठाई और चुप रहने के लिए वे खुद को भी आंशिक रूप से जिम्मेदार मानते हैं।