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एसआईटी ने कारोबारी वीरमणि के खिलाफ पॉक्सो मामले की जांच के लिए और अधिकारियों की मांग की

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चेन्नई, 27 सितंबर (आईएएनएस)। जेम ग्रुप के चेयरमैन आर. वीरमणि के खिलाफ पॉक्सो मामले की जांच में और सीनियर अधिकारियों को शामिल किया जा सकता है क्योंकि स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (डीएसपी) रैंक के अतिरिक्त अधिकारियों की मांग की है।

सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी के चारों सदस्यों ने एक-एक या दो-दो अधिकारियों के नाम सुझाए हैं। नियुक्तियों को पक्का करने से पहले इन नामों की समीक्षा की जाएगी और अगले कुछ दिनों में इस बारे में आदेश आने की उम्मीद है।

इस मामले में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सेंट्रल क्राइम ब्रांच की असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस पीसी थेनमोझी महिलाओं वाली टीम की अगुवाई कर रही हैं। दिशा मित्तल (जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस, लॉ एंड ऑर्डर वेस्ट), जे. मुथारासी (सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस और मीडिया रिलेशंस ऑफिसर) और वीवी गीतांजलि (डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस) टीम में शामिल हैं।

टीम को बढ़ाने का यह अनुरोध ऐसे समय में आया है जब पुलिस वीरमणि के साथ गिरफ्तार किए गए दो साथियों की जमानत याचिकाओं का विरोध कर रही है।

चेन्नई पुलिस ने एक स्पेशल पॉक्सो कोर्ट को बताया कि अगर इन दोनों को जमानत मिल जाती है, तो वे सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं, गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं या देश छोड़कर भाग सकते हैं। कोर्ट में उनकी याचिकाओं पर 29 सितंबर को सुनवाई होनी है।

साथियों की पुलिस कस्टडी रविवार को खत्म हो रही है, जिसके बाद उन्हें आगे के आदेश के लिए कोर्ट में पेश किया जाएगा। वीरमणि और उनके दो साथियों को 29 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। यह गिरफ्तारी अक्टूबर 2025 में केस दर्ज होने के लगभग 11 महीने बाद हुई।

वीरमणी पर एक नाबालिग के यौन उत्पीड़न का आरोप है। इस मामले की जांच ‘बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम’ (पॉक्सो एक्ट) के तहत की जा रही है।

चौथे आरोपी 45 वर्षीय गणेशन को 22 सितंबर को गिरफ़्तार किया गया था। पुलिस का आरोप है कि उसके पास एक वीडियो था, जिसमें कथित तौर पर वीरमणि को एक नाबालिग का यौन उत्पीड़न करते हुए दिखाया गया था लेकिन उन्होंने अधिकारियों को इसकी सूचना नहीं दी। अधिकारियों की मांग इसलिए की गई है क्योंकि एसआईटी जांच जारी रखे हुए है और मामले के अगले चरण की तैयारी कर रही है।

किसी भी नियुक्ति से पहले हर सदस्य के सुझाए गए नामों पर विचार किया जाएगा। पुलिस ने यह नहीं बताया है कि जांच-पड़ताल कब पूरी होगी या कौन से अधिकारी टीम में शामिल हो सकते हैं। अभी अदालत की कार्यवाही उन दो सहयोगियों की कस्टडी और उनकी लंबित जमानत याचिकाओं से जुड़ी है। जांच करने वालों ने सबूतों और गवाहों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। 29 सितंबर को जब अदालत इन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी, तो वह इन आपत्तियों पर भी विचार करेगी।