SGSU Advertisement
Home राजनीति केरल: पूर्व मुख्य सचिव का दावा, सीईसी ज्ञानेश कुमार ने भाजपा के...

केरल: पूर्व मुख्य सचिव का दावा, सीईसी ज्ञानेश कुमार ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने का दिया था प्रस्ताव

0
6

तिरुवनंतपुरम, 27 सितंबर (आईएएनएस)। केरल के पूर्व मुख्य सचिव जिजी थॉमसन ने आरोप लगाया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने उनसे भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए कहा था और चुनाव जीतने पर ‘केंद्रीय मंत्री’ का पद मिलने की संभावना भी जताई थी।

थॉमसन के इन दावों के बाद सीपीआई के राज्य सचिव बिनॉय विश्वम ने तीखा राजनीतिक हमला किया।

2016 में सेवा से रिटायर हुए पूर्व मुख्य सचिव जिजी थॉमसन ने बताया कि सीईसी ज्ञानेश कुमार ने यह सुझाव दिल्ली जाने वाली एक फ्लाइट में दिया था, जब वे दोनों साथ में यात्रा कर रहे थे।

थॉमसन के मुताबिक, सीईसी कुमार ने उनसे पूछा कि क्या वह भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने को तैयार हैं और कहा कि अगर वह चुने जाते हैं, तो केंद्रीय मंत्री बन सकते हैं। थॉमसन का दावा है कि सीईसी ने उन्हें मुख्य सचिव पद से रिटायर होने के बाद भाजपा में शामिल होने का सुझाव भी दिया।

थॉमसन ने कहा कि उन्होंने सीईसी से कहा कि उन्हें चुनावी राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं है और उन्होंने यह सुझाव ठुकरा दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें हैरानी हुई कि सीईसी कुमार की तरफ से ऐसा प्रस्ताव आया।

यह खुलासा ऐसे समय में अहम हो गया है जब ज्ञानेश कुमार को चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर बढ़ती राजनीतिक आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। कई पार्टियों ने उन्हें हटाने की मांग की है और 26 सितंबर से 2 अक्टूबर तक विरोध प्रदर्शन करने का आह्वान किया है।

थॉमसन के खुलासे पर प्रतिक्रिया देते हुए सीपीआई के राज्य सचिव बिनॉय विश्वम ने सीईसी पर तीखा हमला किया और उनके तुरंत इस्तीफे की मांग की।

विश्वम ने इस कथित ऑफर को ‘शर्मनाक’ बताया और कहा कि इससे ज्ञानेश कुमार के राजनीतिक जुड़ाव और सरकारी सेवा के दौरान उनके आचरण पर गंभीर सवाल उठते हैं। विश्वम ने कहा कि इस खुलासे से पता चलता है कि ज्ञानेश कुमार भाजपा के लिए किस हद तक जाने को तैयार थे।

उन्होंने आरोप लगाया कि अलग-अलग पदों पर रहते हुए सीईसी ज्ञानेश कुमार भाजपा के करीबी बन गए थे। विश्वम ने मांग की कि कुमार तुरंत मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से इस्तीफा दें।

विश्वम ने शुक्रवार को आरोप लगाया था कि चुनाव आयोग भाजपा सरकारों के हाथों की कठपुतली की तरह काम कर रहा है और कहा कि लेफ्ट पार्टियों का यह फर्ज है कि वे इसका विरोध करें।

वहीं, चुनाव आयोग ने उन दावों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि दूसरे चुनाव आयुक्तों की ओर से जताई गई अंदरूनी आपत्तियां संस्थागत असहमति थीं। आयोग का कहना है कि सवाल, टिप्पणियां और तकनीकी सुझाव कई सदस्यों वाली संवैधानिक संस्था के सामान्य कामकाज का हिस्सा हैं।

थॉमसन के नए खुलासे से ज्ञानेश कुमार से जुड़े विवाद में एक और राजनीतिक पहलू जुड़ने की संभावना है।