देहरादून, 27 सितंबर (आईएएनएस)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भर्ती घोटाले को लेकर भाजपा के आरोपों पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल में अधीनस्थ चयन आयोग का गठन किया गया था और नियुक्ति में हुई गलती को स्वीकार करते हुए तत्कालीन सरकार ने कार्रवाई भी की थी। उन्होंने महंगाई, बेरोजगारी और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर भी भाजपा और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए।
हरीश रावत ने कहा कि उनकी सरकार ने अधीनस्थ चयन आयोग का गठन किया और नियुक्तियां कीं। उन्होंने स्वीकार किया कि नियुक्ति के मामले में सरकार से ‘एरर ऑफ जजमेंट’ हुआ था और इसके लिए राज्य की जनता से माफी भी मांगी गई थी। हम गलत आदमी को चेयरमैन बना बैठे, जिसने गड़बड़ की। हमने ही उससे इस्तीफा लिया, हमने ही एसआईटी गठित की और तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई।
रावत के मुताबिक, एडिशनल चीफ सेक्रेटरी की अध्यक्षता में गठित कमेटी में आईजी कार्मिक और एडिशनल सेक्रेटरी लॉ को भी सदस्य बनाया गया था। उन्होंने कहा कि परीक्षाओं में गंभीर अनियमितता सामने आने के बाद उन्हें निरस्त करने का रास्ता भी तत्कालीन सरकार ने ही निकाला था।
भाजपा पर निशाना साधते हुए हरीश रावत ने कहा कि अब उन्हीं मामलों को लेकर उनकी सरकार और तत्कालीन मुख्यमंत्री पर आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उस समय वह व्यक्तिगत रूप से नहीं, बल्कि कांग्रेस के मुख्यमंत्री के तौर पर सरकार का नेतृत्व कर रहे थे। भाजपा को चुनौती देते हुए रावत ने कहा कि वह अब चुप नहीं रहेंगे और राजनीतिक रूप से इन आरोपों का जवाब देंगे। उन्होंने कहा, “तुमने ललकारा, तुमने पुकारा, हम चले आए। अब देखते हैं, तुम्हारा मुकाबला करते हैं।”
रावत ने दावा किया कि डॉक्टरों ने उन्हें स्वास्थ्य लाभ के लिए अभी कुछ और समय दिल्ली में रहने की सलाह दी थी, लेकिन भाजपा के आरोपों के कारण वह राजनीतिक मैदान में लौट आए हैं।
कांग्रेस नेता ने महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे पर भी भाजपा को घेरा। उन्होंने कहा कि आम लोगों के लिए जीवनयापन लगातार कठिन होता जा रहा है। परिवारों के लिए बच्चों की स्कूल फीस और चिकित्सा खर्च उठाना मुश्किल हो रहा है, जबकि युवाओं को पर्याप्त रोजगार नहीं मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार लोगों को 2047 के विकसित भारत का सपना दिखा रही है, लेकिन वर्तमान में बेरोजगारी और महंगाई जैसी समस्याओं का सामना करना आम आदमी के लिए मुश्किल हो रहा है।
रावत ने कहा कि रोजगार मिलने के बावजूद कई युवाओं की आय इतनी नहीं है कि वे अपने परिवार का ठीक से पालन-पोषण कर सकें। उन्होंने चिकित्सा सुविधाओं की बढ़ती लागत को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए।
हरीश रावत ने एसआईआर को लेकर भी चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर का दुरुपयोग करके मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया पहले भी होती रही है, लेकिन उस समय इस तरह के सवाल नहीं उठे थे।
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठाई गई आपत्तियां अभी बरकरार हैं।
रावत ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग से संबंधित विवाद सामान्य मामला नहीं है और इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर चुनाव आयोग के समर्थन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं।
रावत ने दावा किया कि चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार दबाव में है और इसी वजह से भाजपा के मुख्यमंत्री इस विषय पर लगातार बयान दे रहे हैं।
कांग्रेस पर भ्रष्टाचार और घोटालों के आरोपों को लेकर भी हरीश रावत ने भाजपा पर पलटवार किया। उन्होंने बोफोर्स, कोयला और कॉमनवेल्थ से जुड़े मामलों का जिक्र करते हुए भाजपा के आरोपों को बेबुनियाद बताया।
आदर्श हाउसिंग मामले का उल्लेख करते हुए उन्होंने भाजपा पर तंज कसा और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण का जिक्र किया। रावत ने कहा कि भाजपा कांग्रेस पर जिन पुराने मामलों को लेकर सवाल उठाती रही है, उससे जुड़े नेता अब भाजपा में हैं।
हरीश रावत ने कहा कि भाजपा की ओर से लगाए जा रहे आरोपों का कांग्रेस राजनीतिक रूप से मुकाबला करेगी और महंगाई, बेरोजगारी तथा चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को जनता के बीच उठाती रहेगी।
