बेंगलुरु, 28 सितंबर (आईएएनएस)। नकली दवा बनाने के मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने सोमवार को बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मुख्य आरोपी प्रशांत रंजन बाबू को गिरफ्तार किया। वह अजरबैजान से भारत लौटा था।
पुलिस के अनुसार, नकली दवा नेटवर्क का पर्दाफाश होने के बाद प्रशांत अजरबैजान भाग गया था और जांच टीम ने उसे वहीं ट्रैक किया। एसआईटी के दबाव के बाद वह भारत लौटा और सोमवार सुबह एयरपोर्ट पर पहुंचते ही उसे हिरासत में ले लिया गया।
एसआईटी उसे सोमवार को संबंधित अदालत में पेश करेगी और आगे की पूछताछ के लिए उसकी कस्टडी की मांग कर सकती है।
जांचकर्ता नकली दवा नेटवर्क के दायरे, उन जगहों जहां कथित तौर पर दवाएं बनाई और बांटी जा रही थीं, और यह रैकेट कितने समय से चल रहा था, इन सब की जांच कर रहे हैं।
प्रशांत से पूछताछ से नेटवर्क और नकली दवा बनाने और बांटने के इस रैकेट में शामिल अन्य लोगों के बारे में और जानकारी मिलने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि बेंगलुरु में नकली दवाओं का एक बड़ा घोटाला सामने आया था, जिसमें 5 करोड़ रुपए से ज्यादा कीमत की नकली, एक्सपायर्ड और री-लेबल की गई जीवन रक्षक, आईसीयू और कैंसर की दवाएं जब्त की गई थीं। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने एक स्थानीय फार्मेसी मालिक को गिरफ्तार किया और पाया कि यह अवैध नेटवर्क 90 से ज्यादा अस्पतालों और क्लीनिकों को खराब गुणवत्ता वाली दवाएं सप्लाई करता था।
बाद में, एसआईटी ने कर्नाटक, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में कई जगहों पर छापेमारी की। कर्नाटक फ़ूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने घोटाले से जुड़े रिटेलर्स, होलसेलर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स के 16 ड्रग लाइसेंस रद्द कर दिए हैं और आठ अन्य को सस्पेंड कर दिया है।
सस्पेंड किए गए लाइसेंसों में फाइजर का सीएंडएफ (कैरीइंग एंड फॉरवर्डिंग) डिपो भी शामिल था। कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री यू.टी. खादर ने कहा कि एजेंसी जांचकर्ताओं के साथ सहयोग करने या जब्त की गई नकली दवाओं के केमिकल घटकों की लैब-टेस्टिंग के लिए जरूरी रेफरेंस स्टैंडर्ड उपलब्ध कराने में नाकाम रही।
चूंकि कैंसर और गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली नकली दवाएं बांटी गई थीं, इसलिए स्वास्थ्य विभाग प्रभावित मरीजों का पता लगाने और उनकी सेहत की स्थिति का आकलन करने की कोशिश कर रहा है।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे संदिग्ध पैकेजिंग के लिए लेबल को ध्यान से देखें और अगर कोई क्यूआर कोड स्कैन नहीं हो रहा है, तो इसकी सूचना सीधे ड्रग एनफोर्समेंट अधिकारियों को दें।
स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) और ड्रग्स कंट्रोल डिपार्टमेंट ने बेंगलुरु में कृपा हेल्थकेयर के फार्मेसी मालिक वीरेश कुमार जैन को गिरफ्तार किया और 5 करोड़ रुपए से ज्यादा कीमत की नकली दवाएं जब्त कीं।
