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कोलकाता: बैंक धोखाधड़ी केस में ईडी की कार्रवाई, तायल ग्रुप के 12 ठिकानों पर छापेमारी जारी

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कोलकाता, 30 सितंबर (आईएएनएस)। कोलकाता में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से ‘तायल ग्रुप’ से जुड़ी 12 जगहों पर तलाशी ली जा रही है। यह कार्रवाई बैंक धोखाधड़ी और आईबीसी (इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड) के प्रावधानों का गलत इस्तेमाल करके पीएमएलए (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) की आगे की कार्रवाई को रोकने से जुड़े एक मामले के सिलसिले में की जा रही है।

दरअसल, तायल ग्रुप ने कई कंपनियों के जरिए बैंक फंड हासिल किए और बैंकों के साथ धोखाधड़ी की, जिसके लिए ईडी ने कोलकाता में दो ईसीआईआर (प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट) दर्ज कीं। पहली ईसीआईआर यूको बैंक धोखाधड़ी से जुड़ी है, जिसमें के. लाइफस्टाइल एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड और अन्य द्वारा 296.25 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी शामिल है।

दूसरी ईसीआईआर कंसोर्टियम धोखाधड़ी से जुड़ी है, जिसमें बैंक ऑफ इंडिया लीड बैंक था और इसमें एक्टिफ कॉर्पोरेशन लिमिटेड, जयभारत टेक्सटाइल्स एंड रियल एस्टेट लिमिटेड और अन्य द्वारा 524.61 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी शामिल है। दोनों मामलों में अपराध से हुई कुल कमाई 820.86 करोड़ रुपए है।

ग्रुप की कंपनियों ने प्रोडक्शन क्षमता और मशीनरी के बारे में झूठे बयान देकर स्टॉक स्टेटमेंट में हेरफेर करके और गिरवी रखी गई मशीनरी को बिना इजाजत बेचकर बैंकों को गुमराह किया। उन्होंने प्रमोटर के कंट्रोल वाली शेल कंपनियों के जरिए बैंक फंड को घुमाया और उसे रियल एस्टेट एसेट्स में लगाया, जिसमें नागपुर का ‘एम्प्रेस मॉल’ भी शामिल है, जिसे जांच के दौरान ईडी ने जब्त कर लिया है।

8 मई 2019 को एम्प्रेस मॉल को अटैच करने के आदेश के कुछ समय बाद, कथित फाइनेंशियल क्रेडिटर्स, जो तायल ग्रुप की ही करीबी कंपनियां थीं, ने आईबीसी की धारा 7 के तहत कॉर्पोरेट गारंटर केएसएल एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड के खिलाफ सीआईआरपी की कार्रवाई शुरू की।

जांच से पता चला है कि इन क्रेडिटर कंपनियों के कम से कम आठ डायरेक्टर जुड़ी हुई कंपनियों के नेटवर्क के जरिए केएसएल एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड के पांच डायरेक्टरों के साथ डायरेक्टरशिप के तौर पर जुड़े हुए हैं। कथित कर्ज एक दिखावटी कागजी लेन-देन था, जिसे किसी दूसरे मकसद से किया गया था।

रेजोल्यूशन प्रोफेशनल्स (आरपी) ने बिना सही जांच-पड़ताल के प्रमोटर से जुड़ी शेल कंपनियों के बिना-वेरिफाई किए गए और बढ़ा-चढ़ाकर बताए गए ब्याज वाले दावों को स्वीकार करके आईबीसी का गलत इस्तेमाल किया। सीओसी (क्रेडिटर्स की समिति) में इन दिखावटी क्रेडिटर्स को बहुमत वोटिंग अधिकार देकर, आरपी ने सुरक्षित बैंकों के वोटिंग शेयर को कम करके उन्हें अल्पसंख्यक बना दिया, जिससे असल में उनके कानूनी वोटिंग कंट्रोल को नाकाम कर दिया गया। आईआरपी ने प्रमोटरों के लिए एक जरिया बनकर काम किया। उन्होंने पीएमएलए के तहत की गई जब्ती को रद्द करने के लिए आवेदन किए और अदालतों से कई प्रतिकूल आदेशों और ईडी द्वारा एम्प्रेस मॉल के भौतिक कब्जे की जानकारी छिपाई।

उनके इस व्यवहार की कड़ी आलोचना हुई और एनसीएलटी (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) ने उन्हें हटा दिया। आरपी यानी सीए किरण चिनुभाई शाह (केएसएल एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड के आरपी) और विनोद कुमार पुखराज अंबावत (एक्टिव कॉर्पोरेशन लिमिटेड के आरपी) ने दावों की पुष्टि नहीं की या संबंधित पक्षों को बाहर नहीं रखा।

उन्होंने ब्याज के बढ़े-चढ़े दावों को स्वीकार कर लिया, जिसके कारण एनसीएलटी ने 11 नवंबर 2025 को विनोद कुमार पुखराज अंबावत पर 50,000 रुपए का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया। एक अन्य आरपी, नरेन सेठ (जयभारत टेक्सटाइल्स एंड रियल एस्टेट लिमिटेड के आरपी) को आईबीबीआई (भारतीय दिवाला एवं शोधन अक्षमता बोर्ड) की अनुशासनात्मक समिति ने कदाचार के लिए निलंबित कर दिया।