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‘क्या पीएससी परीक्षा में हुई चूक साफ तौर पर भ्रष्टाचार थी’, स्टेट प्लानिंग बोर्ड की भर्ती परीक्षा मामले में हाईकोर्ट ने पूछे सवाल

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कोच्चि, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। केरल हाईकोर्ट ने सोमवार को पब्लिक सर्विस कमीशन (पीएससी) से स्टेट प्लानिंग बोर्ड की भर्ती परीक्षा में 58 नंबर के जवाबों की जांच न करने को लेकर कड़े सवाल किए। हाईकोर्ट ने पूछा कि क्या यह गंभीर चूक साफ तौर पर भ्रष्टाचार थी और क्या संवैधानिक भर्ती संस्था के अंदर हुए कथित अपराधों की जांच के लिए कोई सिस्टम नहीं होना चाहिए।

ये कड़ी टिप्पणियां उस वक्त की गईं जब कोर्ट परीक्षा में हुई गड़बड़ियों की क्राइम ब्रांच की जांच को पीएससी की चुनौती पर सुनवाई कर रहा था। कोर्ट की ओर से सवाल किया गया कि 58 नंबर के जवाबों को बिना जांचे कैसे छोड़ा जा सकता है और कहा कि यह आरोप बहुत गंभीर है।

कोर्ट ने कहा कि पीएससी वह संस्था है, जिस पर लाखों नौकरी के उम्मीदवार निर्भर हैं और इसकी विश्वसनीयता और युवा पीढ़ी की उम्मीदों की रक्षा की जानी चाहिए। सरकार ने पीएससी के इस तर्क का विरोध किया कि यह चूक सिर्फ क्लर्क की या तकनीकी गलती थी।

सरकारी वकील ने दलील दी, “58 नंबर के जवाबों की जांच न करने को क्लर्क की गलती कहकर सही नहीं ठहराया जा सकता।” सरकार ने कहा कि यह चूक सोची-समझी हेरफेर का नतीजा थी और इसे मामूली प्रशासनिक गलती नहीं कहा जा सकता।

सरकार ने कोर्ट को बताया कि पीएससी के खिलाफ 150 से ज्यादा शिकायतें आई हैं और पीएससी के चेयरमैन और सदस्य जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। कोर्ट ने सवाल किया कि नोटिस मिलने के बावजूद अधिकारी जांच टीम के सामने पेश क्यों नहीं हुए?

कोर्ट ने कहा कि जांच करने वालों के सामने पेश होना पीएससी अधिकारियों की नैतिक जिम्मेदारी है। कोर्ट ने कहा कि अगर वे नोटिस के बावजूद गैर-हाजिर रहते हैं, तो सरकार को सख्त कार्रवाई पर विचार करना चाहिए।

यह विवाद इसलिए भी अहम है कि मौजूदा पीएससी में एक चेयरमैन और 15 सदस्य हैं, जिनकी नियुक्ति पिछली पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली वामपंथी सरकार के दौरान हुई थी। संविधान के तहत, स्टेट पीएससी के चेयरमैन और सदस्य छह साल या 62 साल की उम्र तक (जो भी पहले हो) अपने पद पर रहते हैं।

प्लानिंग बोर्ड की जिस भर्ती को लेकर यह विवाद शुरू हुआ, वह भी विजयन सरकार के दौरान ही शुरू की गई थी। सीनियर पद के लिए नोटिफिकेशन 2022 में जारी किया गया था और परीक्षा जुलाई 2023 में हुई थी। यह परीक्षा प्लानिंग बोर्ड में ‘चीफ’ लेवल के तीन पदों के लिए आयोजित की गई थी। पहले पेपर में 58 मार्क्स वाले दस सवालों का मूल्यांकन नहीं किया गया।

जांच के अनुसार, इस गड़बड़ी का असर परीक्षा में शामिल हुए सभी 228 उम्मीदवारों पर पड़ा। इसके बाद रैंक लिस्ट जारी की गई और दो पदों पर नियुक्तियां की गईं। क्राइम ब्रांच अब इस बात की जांच कर रही है कि मूल्यांकन में हुई यह चूक महज एक गलती थी या फिर यह जानबूझकर और कुछ खास उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाने के इरादे से की गई थी।

पीएससी ने आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग करते हुए हाई कोर्ट का रुख किया है। उसका कहना है कि यह चूक अनजाने में हुई थी और उसने सरकार की ओर से मुकदमा चलाने की मंजूरी को भी चुनौती दी है।