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Home राष्ट्रीय समुद्र को एक अवसर की तरह देखना होगाः रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

समुद्र को एक अवसर की तरह देखना होगाः रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

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नई दिल्ली, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि हमें समुद्र को एक अवसर की तरह देखना होगा। समुद्र हमारे लिए विकास का रास्ता भी है। इसलिए हमें समुद्र को अपनी समृद्धि और अपनी शक्ति के वाहक के रूप में देखना होगा। उन्होंने कहा कि यह अच्छा लगता है, कि नौसेना ने बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को बदला है।

वह सोमवार को विशाखापटनम में नौसेना प्रमुख कृष्णा स्वामीनाथन व अन्य वरिष्ठ नौसेना अधिकारियों के बीच बोल रहे थे। यहां रक्षामंत्री ने कहा, “आज हमारे पास स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर है। आज हमारे पास परमाणु पनडुब्बियां हैं। आज हमारे पास युद्धपोत हैं। आज हमारे पास स्कॉर्पियन श्रेणी की पनडुब्बियां हैं। सबसे बड़ी बात, हमारे पास वो जज्बा भी है, वो जूनून भी है और वो देशभक्ति भी है, जो किसी भी हथियार से बड़ी है।”

उन्होंने नौसैनिकों से कहा कि आप लोगों के पराक्रम के कारण, हमारी नौसेना, दुनिया की सबसे ताकतवर नौसेनाओं में गिनी जाती है।

राजनाथ सिंह ने कहा, “मुझे इस बात का गर्व है कि हिंद प्रशांत महासागर में, भारतीय नौसेना का डंका बजता है। मुझे इस बात का भी गर्व है कि जब-जब देश और दुनिया को जरूरत पड़ी है, हमारी नौसेना ने हमेशा अपना फर्ज निभाया है।”

गौरतलब है कि भारतीय सेनाएं लगातार आधुनिकता की और बढ़ रही है। तीनों सेनाएं नियमित तौर पर अलग अलग देशों के साथ मिलकर युद्धाभ्यास भी करती हैं। अभी भी भारत व कजाकिस्तान के बीच सैन्य सहयोग को मजबूती देने वाला संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘काजिंद-2026’ कजाकिस्तान के ओस्केमेन में पूरे जोश के साथ जारी है।

अभ्यास के नौवें संस्करण में दोनों देशों के सैनिक साथ मिलकर युद्ध कौशल, समन्वय और एक-दूसरे के साथ मिलकर अभियान चलाने की क्षमता को मजबूत कर रहे हैं। 28 सितंबर से 11 अक्टूबर तक चल रहे इस अभ्यास में दोनों देशों के सैन्य दल एक-दूसरे के अनुभवों और युद्धक तौर-तरीकों को समझ रहे हैं।

प्रशिक्षण के दौरान सैनिकों को अलग-अलग परिस्थितियों में साथ काम करने का अभ्यास कराया जा रहा है। इससे दोनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और आपसी समझ विकसित हो रही है। अभ्यास के दौरान सैनिकों ने संयुक्त शारीरिक प्रशिक्षण और खेल गतिविधियों में भी हिस्सा लिया। इससे उनकी शारीरिक क्षमता के साथ-साथ टीम भावना और आपसी सहयोग को बढ़ावा मिला। प्रशिक्षण के तहत रणनीतिक दिशा-निर्धारण अभ्यास कराया गया।

अलग-अलग तरह के भूभाग में आगे बढ़ते हुए सैनिकों ने अपनी दिशा पहचानने और योजनाबद्ध तरीके से एक साथ आगे बढ़ने का अभ्यास किया। इस दौरान सैनिकों ने कठिन परिस्थितियों में भी बेहतर तालमेल के साथ काम करने की अपनी क्षमता को परखा। इसके अलावा भारतीय और कजाख सैनिकों ने हथियार संचालन और सामरिक प्रशिक्षण में भी हिस्सा लिया।

छोटे हथियारों से गोलीबारी का अभ्यास किया गया। अभ्यास के दौरान भारतीय दल ने कजाख सैनिकों के साथ संयुक्त योग सत्र में भी हिस्सा लिया। यह अभ्यास भारत और कजाकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे रक्षा सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

इसके जरिए दोनों सेनाओं को साथ प्रशिक्षण लेने, अपने अनुभव साझा करने और संयुक्त अभियानों के लिए बेहतर तालमेल विकसित करने का अवसर मिल रहा है।