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कर्नाटक: दोषी की पत्नी की शिकायत से यौन शोषण और फर्जी सुप्रीम कोर्ट आदेश से रिहाई का खुलासा

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बेंगलुरु, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। कर्नाटक में एक कैदी की पत्नी के साथ जेल अधिकारियों द्वारा कथित यौन शोषण और उसके पति को फर्जी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर जेल से रिहा कराने का मामला सामने आया है। रिहाई के बाद दोषी ने पत्नी को कथित तौर पर छोड़ दिया और दूसरी महिला से शादी कर ली। इसके बाद पत्नी ने जेल विभाग में विस्तृत शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पूरा मामला सामने आया।

पुलिस ने मंगलवार को बताया कि बेंगलुरु के परप्पना अग्रहारा पुलिस ने उम्रकैद की सजा काट रहे शंकर ए. और जेल कर्मचारी श्रीकांत एस. को गिरफ्तार किया है। इस मामले में जेल विभाग के नॉर्थ जोन के डीआईजी सोमशेखर को भी गिरफ्तार किया गया है। मामला 2018 में बेंगलुरु सेंट्रल जेल से शंकर की कथित अवैध रिहाई और फर्जी दस्तावेज तैयार करने से जुड़ा है।

पुलिस के मुताबिक, शंकर की पत्नी अपने पति से मिलने के लिए जेल जाती थी। इसी दौरान उसकी जेल अधिकारियों से पहचान हुई। पति की रिहाई के बाद जब उसने कथित तौर पर पत्नी को छोड़ दिया और दूसरी महिला से शादी कर ली, तो उसने जेल विभाग में शिकायत की। शिकायत में महिला ने कथित यौन शोषण और पति की जेल से रिहाई से जुड़ी परिस्थितियों का विस्तृत ब्यौरा दिया।

जांच के अनुसार, श्रीकांत उस समय सेकेंड डिवीजन असिस्टेंट (एसडीए) के पद पर कार्यरत था और वर्तमान में कन्विक्ट प्रिजनर सेक्शन में फर्स्ट डिवीजन असिस्टेंट है। आरोप है कि उसने महिला का कथित यौन शोषण किया और बाद में शंकर को जेल से बाहर निकालने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश की फर्जी प्रति तैयार करने में मदद की।

पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान महिला के बयान से तत्कालीन चीफ सुपरिंटेंडेंट/डीआईजी सोमशेखर की कथित भूमिका भी सामने आई। आरोप है कि सोमशेखर महिला को वीडियो कॉल करते थे और उससे कपड़े उतारने के लिए कहते थे। जांचकर्ताओं ने कथित वीडियो हासिल कर उसे फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) जांच के लिए भेजा है।

पुलिस के अनुसार, महिला जेल में अपने पति से मिलने के दौरान सोमशेखर के संपर्क में आई थी। आरोप है कि उन्होंने उसके पति को जेल से बाहर निकालने में मदद करने का भरोसा दिया और बाद में उसका कथित यौन शोषण किया। इसके बाद श्रीकांत भी इस पूरी कथित साजिश में शामिल हो गया और फर्जी अदालती दस्तावेज तैयार करने में मदद की।

पुलिस ने बताया कि मामले की जांच 20 मई को बेंगलुरु सेंट्रल जेल के प्रभारी अधीक्षक कर्ण बी. क्षेत्री की शिकायत के बाद शुरू हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि शंकर ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश की फर्जी प्रति तैयार की और दावा किया कि उसे 13 नवंबर 2018 को इसी आदेश के आधार पर जेल से रिहा किया गया था। इस संबंध में परप्पना अग्रहारा पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया था।

जांच में पता चला कि शंकर को चिक्कपेट पुलिस थाने में दर्ज एक मामले में दोषी ठहराया गया था। उस मामले में आईपीसी की धारा 364(ए) और 120(बी) के तहत कार्रवाई हुई थी। फास्ट ट्रैक कोर्ट-1 ने 12 जुलाई 2004 के अपने फैसले में उसे उम्रकैद की सजा और 10 हजार रुपये का जुर्माना सुनाया था। बाद में कर्नाटक हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी उसकी सजा और दोषसिद्धि को बरकरार रखा था।

जांच के मुताबिक, श्रीकांत ने 2 नवंबर 2018 की एक कथित आपराधिक अपील याचिका से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के आदेश की फर्जी प्रति तैयार की। इसी फर्जी दस्तावेज के आधार पर शंकर को 13 नवंबर 2018 को सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया।

शंकर और श्रीकांत को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहां से दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इसके बाद सोमशेखर को भी गिरफ्तार किया गया और आगे की पूछताछ तथा जांच के लिए 9 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है।

पुलिस अब सोमशेखर की कथित यौन शोषण की भूमिका के साथ-साथ शंकर की रिहाई में उनकी भूमिका की भी विस्तृत जांच कर रही है। इसके अलावा यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इसी तरह के फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल अन्य कैदियों को जेल से रिहा कराने के लिए भी किया गया था।

जांच इलेक्ट्रॉनिक सिटी डिवीजन के डीसीपी एम. नारायण की निगरानी में चल रही है। एसीपी सतीश के.एम., पुलिस निरीक्षक पी.जी. नवीन कुमार, पीएसआई महादेवय्या और कलावती सहित अन्य पुलिसकर्मी जांच और गिरफ्तारियों में शामिल रहे। मामले में आगे की जांच जारी है।