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भारत-रूस कार्य समूह की वार्ता, सैन्य-तकनीकी सहयोग की हुई समीक्षा

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नई दिल्ली, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत और रूस के बीच गुरुवार को नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण वार्ता हुई। यह दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को गति देने की दिशा में एक अहम बैठक थी। बैठक में दोनों देशों ने मौजूदा सैन्य-तकनीकी सहयोग की समीक्षा की गई। इसके साथ-साथ रक्षा उपकरणों के संयुक्त उत्पादन और संयुक्त विकास की नई संभावनाओं पर भी चर्चा की गई है।

यह बैठक दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक रक्षा साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग के सैन्य-तकनीकी सहयोग और रक्षा उद्योग से जुड़े 24वें कार्य समूह की बैठक थी।

नई में गुरुवार को इस बैठक का उद्घाटन सत्र आयोजित किया गया। बैठक में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक की सह-अध्यक्षता भारत की ओर से रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार और रूस की ओर से सैन्य-तकनीकी सहयोग के लिए संघीय सेवा के प्रथम उप निदेशक आंद्रेई ए. बोयत्सोव ने की।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, बैठक में दोनों पक्षों ने भारत और रूस के बीच चल रहे सैन्य-तकनीकी सहयोग की प्रगति की समीक्षा की। इसके साथ ही रक्षा क्षेत्र में संयुक्त उत्पादन और संयुक्त विकास की नई पहलों पर विशेष रूप से चर्चा हुई। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी को और मजबूत करना तथा सहयोग के नए क्षेत्रों को आगे बढ़ाना है।

गौरतलब है कि भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग पिछले कई दशकों से रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार रहा है। समय के साथ यह संबंध केवल रक्षा उपकरणों की खरीद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संयुक्त अनुसंधान, तकनीकी विकास और भारत में रक्षा प्रणालियों के संयुक्त उत्पादन तक विस्तारित हुआ है। दोनों देशों के बीच सैन्य-तकनीकी सहयोग के लिए 2021 से 2031 की अवधि का समझौता भी लागू है। इसके तहत संयुक्त अनुसंधान, विकास, उत्पादन और रक्षा उपकरणों के रखरखाव से जुड़े सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।

भारत-रूस रक्षा सहयोग में ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली, सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान, टी-90 टैंक और एके-203 राइफल जैसे संयुक्त विकास या भारत में उत्पादन से जुड़े कार्यक्रम महत्वपूर्ण उदाहरण रहे हैं। इससे पहले 29 अक्टूबर 2025 को संजीव कुमार के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने मॉस्को में इसी कार्य समूह की 23वीं बैठक में भाग लिया था।

अब 24वीं बैठक की मेजबानी नई दिल्ली में होने के साथ दोनों देशों ने सैन्य-तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने और रक्षा उद्योग में साझा विकास व उत्पादन की संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित किया है।