नई दिल्ली, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) ने गुरुवार को हुई जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में लिए गए फैसलों का स्वागत किया है। संगठन का कहना है कि परिषद ने टैक्स स्लैब में बदलाव की बजाय जीएसटी प्रणाली को अधिक सरल और व्यवसाय अनुकूल बनाने पर ध्यान दिया है, जिससे विशेष रूप से एमएसएमई क्षेत्र को राहत मिलेगी।
पीएचडीसीसीआई ने कहा कि बैठक में लिए गए फैसले व्यवसायों पर अनुपालन (कंप्लायंस) का बोझ कम करेंगे और करदाताओं में अनावश्यक कार्रवाई के भय को घटाएंगे। हालांकि संगठन ने यह भी कहा कि व्यापार और उद्योग जगत द्वारा उठाए गए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अभी निर्णय होना बाकी है और परिषद को उन पर जल्द विचार करना चाहिए।
चैंबर ने कहा कि जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक भरोसे पर आधारित कर व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। गिरफ्तारी के अधिकार को समाप्त करने, अभियोजन की सीमा को बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए करने और दंडात्मक प्रावधानों को कम करने से यह संदेश गया है कि ईमानदार करदाताओं को अपराधी की तरह नहीं देखा जाएगा।
पीएचडीसीसीआई ने रिफंड प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने के फैसले का भी स्वागत किया। परिषद के फैसले के अनुसार अब रिफंड दावों को स्वीकार करने की समय सीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन कर दी गई है।
इसके अलावा, जोखिम मूल्यांकन (रिस्क असेसमेंट) के आधार पर सिस्टम स्वचालित रूप से रिफंड दावे का 90 प्रतिशत हिस्सा मंजूर करेगा। रिफंड आदेश जारी होने के बाद भुगतान की अवधि भी घटाकर तीन कार्य दिवस कर दी गई है।
चैंबर का मानना है कि इससे उद्योगों, विशेष रूप से निर्यातकों को कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) की उपलब्धता में मदद मिलेगी।
जीएसटी परिषद ने इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के दायरे को भी बढ़ाया है। अब कर्मचारियों के लिए ली गई हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस सेवाओं, फैक्ट्री परिसरों के बाहर लगाए गए दूरसंचार टावरों और पाइपलाइनों पर भी आईटीसी का लाभ मिलेगा।
इसके अलावा फ्री सैंपल और एक्सपायरी के कारण राइट ऑफ किए गए स्टॉक पर भी कुछ शर्तों के साथ आईटीसी की अनुमति दी गई है।
पीएचडीसीसीआई ने कहा कि इन फैसलों से कारोबार करने में आसानी (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही उद्योगों की तरलता में सुधार होगा और अनुपालन संबंधी जटिलताएं कम होंगी।
संगठन ने कहा कि बोनाफाइड खरीदारों की सुरक्षा समेत कई लंबित मुद्दों पर अभी निर्णय लिया जाना बाकी है। चैंबर ने जीएसटी परिषद से आग्रह किया कि व्यापार और उद्योग जगत की इन चिंताओं पर भी जल्द विचार किया जाए ताकि कर प्रणाली और अधिक पारदर्शी तथा व्यवसाय अनुकूल बन सके।
पीएचडीसीसीआई के अनुसार, जीएसटी परिषद के ताजा फैसले देश में निवेश, उद्योग और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में एक सकारात्मक कदम साबित हो सकते हैं।
