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    एमएसएमई के लिए एनपीए मानदंडों की समीक्षा की जरूरत, 90 दिनों की एक समान समयसीमा सही नहीं : मुख्य आर्थिक सलाहकार नागेश्वरन

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    नई दिल्ली, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने शुक्रवार को कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) वर्गीकरण मानदंडों की समीक्षा करनी चाहिए, ताकि इन्हें इन उद्यमों की कारोबारी प्रथाओं और नकदी प्रवाह के पैटर्न के अनुरूप बनाया जा सके।

    उन्होंने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले व्यवसायों का नकदी प्रवाह चक्र अलग-अलग होता है। ऐसे में एनपीए घोषित करने के लिए 90 दिनों की एक समान समयसीमा सभी एमएसएमई के लिए उपयुक्त नहीं है।

    नागेश्वरन ने कहा कि एसएमए की श्रेणी में आने के बाद भी कर्जदारों को गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। कई व्यवसायों को उनके खातों को औपचारिक रूप से एनपीए घोषित किए जाने से पहले ही मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

    नागेश्वरन ने ‘सा-धन’ के राष्ट्रीय सम्मेलन में कहा, “जिस समय आपको एसएमए के रूप में वर्गीकृत किया जाता है, आप लगभग वास्तविक रूप से, भले ही कानूनी रूप से नहीं, पहले ही एनपीए बन जाते हैं। मुझे लगता है कि इसमें बदलाव की जरूरत है।”

    उन्होंने कहा, “हमें एक समान मानक अपनाने के बजाय कारोबारी प्रथाओं और नकदी प्रवाह के पैटर्न के अनुरूप ऐसे मानदंड विकसित करने की जरूरत है।”

    बैंक भुगतान में देरी की अवधि के आधार पर ऋण खातों को एसएमए के रूप में वर्गीकृत करते हैं। 30 दिनों तक की बकाया अवधि वाले खातों को एसएमए-0, 31 से 60 दिनों तक के बकाया खातों को एसएमए-1 और 61 से 90 दिनों तक के बकाया खातों को एसएमए-2 के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। 90 दिनों से अधिक समय तक भुगतान बकाया रहने पर ऋण खाते को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) घोषित कर दिया जाता है।

    नागेश्वरन ने कहा कि भारत में एमएसएमई विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हैं और प्रत्येक क्षेत्र की कार्यशील पूंजी का चक्र अलग-अलग होता है। इसलिए, 90 दिनों का एक समान मानदंड सभी एमएसएमई के लिए उपयुक्त नहीं है।

    हालांकि, मुख्य आर्थिक सलाहकार ने इस बात पर भी जोर दिया कि सूक्ष्म वित्त क्षेत्र को जरूरत से ज्यादा कर्ज लेने से बचना चाहिए और अपने कारोबार के वित्तपोषण के लिए आंतरिक बचत पर अधिक निर्भर रहना चाहिए।