पटना, 10 अक्टूबर (आईएएनएस)। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए चुनाव प्रक्रिया में व्यापक और पारदर्शी सुधारों की मांग की है। उन्होंने कहा कि पिछले आठ से दस वर्षों में समाज के एक बड़े वर्ग का चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया पर विश्वास कम हुआ है। उन्होंने बेरोजगारी, शिक्षा और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर युवाओं में बढ़ते असंतोष का जिक्र करते हुए सरकार को चेतावनी दी कि इस आंदोलन को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
प्रशांत किशोर ने कहा कि चुनाव आयोग की कार्यशैली को लेकर लोगों की चिंताएं किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नए मतदाता बनाने के लिए फॉर्म-6 और फॉर्म-7 में किए गए बदलाव, मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का इस्तेमाल, चुनाव की तारीखें तय करने की प्रक्रिया, आचार संहिता लागू करने, पर्यवेक्षकों की नियुक्ति और मतगणना को लेकर सवाल उठे हैं।
बिहार का उदाहरण देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से दो दिन पहले तक लोगों को दस-दस हजार रुपए देकर वोट खरीदने की कोशिश की गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि चुनाव के दौरान जन सुराज के कार्यकर्ताओं को पकड़कर विरोधी पक्ष को प्रभावित किया गया। ऐसे मामलों से चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा कमजोर हुआ है।
प्रशांत किशोर ने कहा कि जब तक चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया में व्यापक तथा पारदर्शी सुधार नहीं किए जाएंगे, तब तक विरोध-प्रदर्शन जारी रह सकते हैं। मौजूदा आंदोलन केवल शुरुआत है और इसे रोकना आसान नहीं होगा।
दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था का जिक्र करते हुए किशोर ने दावा किया कि सड़कों पर करीब 40 हजार पुलिसकर्मी, अर्धसैनिक बल और अन्य सुरक्षा बल तैनात हैं। उन्होंने इसे आंदोलन को लेकर सरकार की चिंता से जोड़ते हुए कहा कि सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद युवाओं के असंतोष को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। प्रशांत किशोर ने कहा कि युवाओं का गुस्सा केवल चुनावी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है। शिक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी और पेपर लीक जैसे मुद्दे भी उनके असंतोष की बड़ी वजह हैं। जंतर-मंतर पर पहले हुए प्रदर्शन के बाद भी युवाओं की नाराजगी खत्म नहीं हुई है।
