तिरुवनंतपुरम, 10 अक्टूबर (आईएएनएस)। केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने शनिवार को सीपीआई(एम) नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की कड़ी निंदा की और राज्य के मुख्य सचिव विश्वनाथ सिन्हा और नई दिल्ली स्थित रेजिडेंट कमिश्नर पुनीत कुमार को उनकी तत्काल रिहाई के लिए पुलिस अधिकारियों के साथ समन्वय करने का निर्देश दिया।
सीएम सतीशन ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि वे विजयन की मनमानी हिरासत से बेहद चिंतित हैं और इसकी कड़ी निंदा करते हैं, जिन्हें वर्तमान में मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “मेरे निर्देश पर केरल के मुख्य सचिव और नई दिल्ली स्थित रेजिडेंट कमिश्नर उनकी तत्काल रिहाई के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के लिए दिल्ली पुलिस अधिकारियों के साथ सीधे संपर्क में हैं।”
सतीशन का हस्तक्षेप उन खबरों के बीच आया है, जिनमें कहा गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन करने राजधानी पहुंचे विजयन को पुलिस स्टेशन ले जाने से पहले करीब साढ़े तीन घंटे तक पुलिस वाहन में रखा गया था। लंबे समय तक हिरासत में रहने के कारण दिग्गज नेता को शारीरिक तकलीफ हुई।
विजयन के साथ आए सीपीआई (एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि पुलिस ने उनकी उम्र का ध्यान नहीं रखा और उन्हें खाना और उनकी निर्धारित दवाइयां नहीं दीं। ब्रिटास ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस उच्च अधिकारियों के निर्देश के बिना नेताओं को रिहा करने से इनकार कर रही है।
दिल्ली पुलिस ने कहा कि विजयन और अन्य नेताओं को औपचारिक रूप से गिरफ्तार नहीं किया गया है और उन्हें जल्द ही रिहा कर दिया जाएगा। विजयन की गिरफ्तारी ऐसे समय हुई जब सीपीआई(एम) के नेता और कार्यकर्ता मुख्य चुनाव आयुक्त के विरोध में नई दिल्ली स्थित केरल हाउस से मार्च निकालने की तैयारी कर रहे थे।
पुलिस ने सीपीआई(एम) के महासचिव एमए बेबी, राज्य सचिव एमवी गोविंदन, पीके श्रीमाथी, केके शैलजा और पोलित ब्यूरो सदस्य विजय कृष्णन के अलावा सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीआईटीयू) के नेताओं और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष आदर्श साजी को भी हिरासत में लिया था।
वरिष्ठ नेताओं की गिरफ्तारी से विजयन के साथ आए लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया, जिनमें पूर्व वित्त मंत्री केएन बालागोपाल और ब्रिटास शामिल थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए उन्हें घंटों तक एक वाहन में बैठाए रखा।
सतीशन के हस्तक्षेप से केरल सरकार का दिल्ली पुलिस से सीधा संपर्क स्थापित हो गया, क्योंकि विरोध प्रदर्शन के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री के साथ हुए व्यवहार को लेकर चिंताएं बढ़ रही थीं।
