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सीजेपी के विरोध पर वीएचपी बोली- शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन अराजकता लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं

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नई दिल्ली, 11 अक्टूबर (आईएएनएस)। कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई। विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीराज नायर ने कहा कि संविधान शांतिपूर्ण विरोध की इजाजत देता है, लेकिन भूख हड़ताल और विरोध के नाम पर गड़बड़ी फैलाना लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।

विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीराज नायर ने कहा, ”भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और हमारा संविधान लोकतांत्रिक तरीकों से शांतिपूर्ण विरोध और प्रदर्शन की इजाजत देता है, लेकिन जिस तरह से भूख हड़ताल और विरोध के नाम पर गड़बड़ी फैलाई जा रही है, वह लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है। जब पार्टियां चुनाव जीतती हैं, तो चुनाव आयोग को निष्पक्ष माना जाता है।”

वहीं सदर बाजार बंद होने को लेकर ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश कुमार यादव ने कहा कि दिवाली सीजन में बाजार बंद होने से करोड़ों का नुकसान हुआ और आम लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। इस बीच भाजपा सांसद तरुण चुघ और नेता माधवी लता ने भी कांग्रेस और सीजेपी के विरोध के तरीकों पर सवाल उठाए।

10 अक्टूबर को सीजेपी के विरोध प्रदर्शन के कारण सदर बाजार बंद होने पर फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश कुमार यादव ने कहा, “10 अक्टूबर को न सिर्फ दिल्ली, बल्कि पूरे देश में हर जगह दहशत का माहौल था। एहतियात के तौर पर केंद्र सरकार ने किसी भी तरह की सुरक्षा चूक को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था की और 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया गया। मुझे बाद में पता चला कि दिल्ली के बाहर से आने वाली ट्रेनें रद्द कर दी गई थीं। कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिया गया था। हमारी सदर बाजार के व्यापारियों के साथ बैठक हुई। चूंकि यह दिवाली का त्योहारी सीजन है, इसलिए बाजार बंद होने से करोड़ों का नुकसान हुआ।”

विरोध प्रदर्शन का मार्केट पर प्रभाव को लेकर उन्होंने कहा कि बिजनेस की बात मत करो, एक गरीब आदमी के किचन की बात करो। आम लोगों का क्या जिन्हें मुश्किलें आ रही हैं, जिन्हें हॉस्पिटल में भर्ती होना है। कहीं सामान पहुंचाना है या किसी से मिलना है? वे कैसे मैनेज करेंगे? ऐसे माहौल से सरकार और उनके चुने हुए रिप्रजेंटेटिव पर लोगों का भरोसा कम होता है।

उन्होंने कहा कि इसमें विपक्ष और सरकार दोनों शामिल हैं। विरोध करना मौलिक अधिकार है और नैतिक जिम्मेदारी भी, लेकिन, विरोध का तरीका और सिस्टम इतना सही तरह से व्यवस्थित और लोकतांत्रिक होना चाहिए कि आम लोगों को कोई दिक्कत न हो।

भाजपा सांसद तरुण चुघ ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जिनका इतिहास देश को बंदी बनाने का रहा है, जिन्होंने अपने कार्यकाल में दो दर्जन से ज्यादा चुनी हुई सरकारों को गिराया है और जिन्होंने इस देश में भ्रष्टाचार और वंशवाद की राजनीति को बढ़ावा दिया है, वे लोकतंत्र की बात कर रहे हैं? जिनकी रणनीति में सड़कों पर बूथ लूटना और अराजकता शामिल है, वे लोकतंत्र की बात कर रहे हैं?

उन्होंने कहा कि देश इमरजेंसी, मनमोहन सिंह द्वारा जारी किए गए अध्यादेश को फाड़ना या गांधी-नेहरू परिवार को बड़ा बताते हुए प्रधानमंत्री को छोटा दिखाने का खेल नहीं भूला है। देश जानता है कि लोकतंत्र को कुचलने में किन लोगों का हाथ रहा है। राहुल गांधी के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘मोगैम्बो’ कहने पर तरुण चुघ ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत लगातार तरक्की कर रहा है। मोदी 140 करोड़ भारतीयों के हीरो हैं। दुनिया में कहीं भी रहने वाला भारतीय, नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत पर गर्व महसूस करता है। राहुल गांधी ने अब आईने में अपना चेहरा देखा है, एक फ्रस्ट्रेटेड चेहरा। उन्होंने खुद को आईने में मोगैम्बो के रूप में देखा।

भाजपा नेता माधवी लता ने कहा, “डॉ. अंगोमचा बिमोल मणिपुर से कांग्रेस के सांसद चुने गए हैं और वे जेएनयू दिल्ली के प्रोफेसर हैं। आरोप है कि उन्होंने 11 लड़कियों पर अत्याचार किया है। सवाल उठता है कि अब कहां चले गए हैं हमारे सारे युवा, जो खुद को कॉकरोच जनता पार्टी कहते हैं? क्या इस कॉकरोच जनता पार्टी को इन लड़कियों की कोई फिक्र नहीं है?”

उन्होंने कहा, “क्या यह न्याय और धर्म को भारत में स्थापित करने के लिए बना है या अपने स्वार्थ के लिए? आने वाले कल में शायद कोई राजनीतिक पद पाने के लिए इन्होंने किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़ने की कोशिश की है। जितनी भी लड़कियां पिछली बार नीट एग्जाम के दौरान प्रधानमंत्री के प्रति जिस प्रकार से असंस्कारी बातें कर रही थीं, अब वो सारी लड़कियां कहां चली गई हैं?”

माधवी लता ने कहा, “कॉकरोच पार्टी की सारी लड़कियां कहां चली गई हैं? अपनी ही बिरादरी की 11 लड़कियां हैं, जिन पर अत्याचार हुआ है, जेएनयू दिल्ली में ये सब चल रहा है, लेकिन बात यह है कि ये लोग इलेक्शन कमीशन के खिलाफ इतना बड़ा प्रोटेस्ट करने निकल गए हैं, पुलिस पर पत्थर फेंक रहे हैं। पूरे भारत वर्ष की नई पीढ़ी को क्या सिखाना चाह रहे हैं कि भले ही लड़कियों का बलात्कार हो जाए, लेकिन हम उस पर ध्यान नहीं देंगे? भले ही जेएनयू जैसे विश्वविद्यालयों में लड़कियों के साथ कुछ भी हो जाए, चाहे अपराध करने वाला कांग्रेस का सांसद ही क्यों न हो, हम उसका इस्तीफा नहीं मांगेंगे, उससे सवाल नहीं पूछेंगे, लेकिन इनको प्रधानमंत्री का इस्तीफा चाहिए।”