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‘देश को टकराव नहीं, विवेक और समाधान चाहिए’, सीजेपी के प्रदर्शन पर स्वामी चिदानंद सरस्वती

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ऋषिकेश, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। दिल्ली में सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन को लेकर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने राष्ट्रहित, संवैधानिक मर्यादा और आपसी सौहार्द बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी मांग को उठाने का अधिकार है, लेकिन विरोध-प्रदर्शन मर्यादा के भीतर होना चाहिए। देश को टकराव और आक्रोश की नहीं, बल्कि विवेक, आत्मसंयम और समाधान की आवश्यकता है। सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि राष्ट्र है, तभी हम हैं। राष्ट्र प्रथम और संविधान सर्वोपरि होना चाहिए। संविधान ही समाधान है और संवाद ही समाधान है। किसी भी मुद्दे पर आगे बढ़ते समय इस भावना को ध्यान में रखना जरूरी है।

स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि भारत की शक्ति आपसी सौहार्द और विश्वास में है, न कि टकराव में। उन्होंने महाभारत का उल्लेख करते हुए कहा कि आज देश को किसी नए टकराव की नहीं, बल्कि महान भारत की यात्रा को आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि समाज में सभी की आवाज का सम्मान होना चाहिए। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसी आंदोलन के दौरान संविधान की मर्यादा और सामाजिक एकता प्रभावित न हो। उन्होंने जोर दिया कि आरोप लगाने के बजाय समाधान खोजने और आक्रोश के स्थान पर आत्मसंयम अपनाने की जरूरत है।

पुलिस की भूमिका पर बात करते हुए स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है। यदि अराजकता की स्थिति बनती है, तो पुलिस उसे रोकने का प्रयास करती है। पुलिसकर्मी भी समाज और राष्ट्र परिवार का हिस्सा हैं, इसलिए उनके प्रति सम्मान और संवेदनशीलता बनाए रखनी चाहिए। पुलिस की वर्दी के भीतर भी एक इंसान होता है, जिसका अपना परिवार, उम्मीदें और जिम्मेदारियां होती हैं। इसी तरह प्रदर्शन करने वाले लोग भी समाज का हिस्सा हैं। इसलिए दोनों पक्षों के बीच सम्मान और संवेदनशीलता बनी रहनी चाहिए।

स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि लोग अपनी मांगें जरूर उठाएं, लेकिन ऐसा कोई कदम नहीं होना चाहिए जिससे राष्ट्र की गरिमा को ठेस पहुंचे या समाज की एकता कमजोर हो। समाधान ऐसा होना चाहिए जिसमें किसी का अपमान न हो, किसी के अधिकारों का हनन न हो और पुलिस तथा जनता आमने-सामने न आएं। देश में संवाद और आपसी समझ के जरिए समस्याओं का हल निकालना चाहिए, ताकि संवैधानिक मर्यादा और सामाजिक सद्भाव कायम रहे।