हैदराबाद, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने सोमवार को कहा कि नागरिकों के मतदान अधिकारों की रक्षा के लिए चल रहा संघर्ष एक अन्य स्वतंत्रता आंदोलन के समान है।
भारत की स्वतंत्रता के लिए ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध कांग्रेस नेताओं के संघर्ष को याद करते हुए उन्होंने कहा कि अब वही स्थिति उत्पन्न हो गई है जहां संविधान द्वारा प्रदत्त मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए संघर्ष आवश्यक है।
दिल्ली के तेलंगाना भवन में सोमवार को ‘वोट बचाओ… देश बचाओ’ अभियान के अंतर्गत आयोजित एक बैठक में बोलते हुए मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ‘साइमन गो बैक’ आंदोलन की तर्ज पर, मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए ‘ज्ञानेश गो बैक’ और ‘एसआईआर गो बैक’ के नारों के साथ संघर्ष करने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के एक बयान के अनुसार, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ‘वोट चोरी’ के खिलाफ लड़ाई कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, विपक्ष के नेता राहुल गांधी और भारत गठबंधन के सहयोगी दलों के नेताओं के नेतृत्व में लड़ी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ मिलीभगत करके मतदाता सूची संशोधन की आड़ में मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश रची।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद बीआर अंबेडकर द्वारा तैयार किए गए संविधान ने जनता को मतदान के अधिकार को एक सशक्त हथियार के रूप में दिया। उन्होंने कहा कि मतदान के अधिकार ने राजशाही और वंशवादी शासन को समाप्त करने और सत्ता को जनता के हाथों में सौंपने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मुख्यमंत्री ने बताया कि मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पहले भी किया जा चुका है। जवाहरलाल नेहरू के प्रधानमंत्री रहते हुए 1950 में एसआईआर का उपयोग उन लोगों को मतदान का अधिकार देने के लिए किया गया था जिनके पास यह अधिकार नहीं था।
लोगों से देश के विभाजन के बाद जिन क्षेत्रों में वे चले गए और बस गए, उनका विवरण देने को कहा गया था।
