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संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम कर रहे हैं राहुल गांधी: सतीश पूनिया

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अयोध्या, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। भाजपा सांसद सतीश पूनिया ने इंडिया ब्लॉक के विरोध प्रदर्शन को नैरेटिव की लड़ाई करार दिया है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग पर उंगली उठाना संविधान पर सवाल उठाने जैसा है। उन्होंने सवाल किया कि जब विपक्ष चुनाव जीतता है, तब चुनाव आयोग अच्छा होता है, लेकिन हारने पर उसी आयोग को खराब बताया जाने लगता है।

अयोध्या में मीडिया से बातचीत के दौरान सतीश पूनिया ने आरोप लगाया कि अपना नैरेटिव स्थापित करने के लिए इंडिया ब्लॉक संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास कर रहा है। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया कांग्रेस की सरकारों के कार्यकाल में भी होती रही है। एसआईआर के माध्यम से मतदाता सूची को शुद्ध किया जा रहा है, जिससे सभी को लाभ होगा और लोकतंत्र मजबूत होगा।

सतीश पूनिया ने कहा कि यदि राहुल गांधी और अखिलेश यादव अपनी बात को लेकर इतने आश्वस्त थे, तो उन्होंने पिछले लोकसभा और राज्यसभा सत्रों में सदन के भीतर चर्चा से दूरी क्यों बनाई। उन्होंने कहा कि विपक्ष एसआईआर, विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए), चुनाव सुधार या किसी अन्य मुद्दे पर सदन में चर्चा कर सकता था।

उन्होंने आरोप लगाया कि देश के लोगों के सामने गलत नैरेटिव प्रस्तुत करने से कोई फायदा नहीं होगा। भारत और उत्तर प्रदेश की जनता विपक्ष की राजनीति को अच्छी तरह समझ चुकी है और उसके भ्रम में नहीं आएगी।

राहुल गांधी की राजनीतिक समझ पर सवाल उठाते हुए पूनिया ने कहा कि यह हैरानी की बात है कि इतनी उम्र होने के बावजूद उन्हें चुनावी प्रक्रिया की पर्याप्त समझ नहीं है। देश में 1952 से लगातार चुनाव होते आ रहे हैं। पहले के दौर में चुनावों के दौरान हिंसा की घटनाएं देखने और सुनने को मिलती थीं, जबकि आज चुनाव अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी तरीके से कराए जाते हैं। चुनाव आयोग मतदाता सूची प्रकाशित करने से पहले मतदान केंद्रों पर शिविर लगाता है और सभी राजनीतिक दलों को इसमें भाग लेने के लिए आमंत्रित करता है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कांग्रेस को इस प्रक्रिया पर आपत्ति थी, तो उसने इतने वर्षों तक अपनी शिकायतें क्यों नहीं उठाईं।

सतीश पूनिया ने सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे का हवाला देते हुए दावा किया कि इस तरह के आंदोलनों को खड़ा करने के पीछे विदेशी फंडिंग की भूमिका होने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि यह उनका अपना दावा नहीं, बल्कि साल्वे की ओर से कही गई बात है। विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) से जुड़े विधेयक का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि देश में लंबे समय से बड़े पैमाने पर धर्मांतरण होता रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस विधेयक को लेकर घबराहट के कारण देश में अराजकता फैलाने की कोशिश की जा रही है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान पर पूनिया ने कहा कि राज्य में राशन वितरण और बेहतर शासन व्यवस्था ने लोगों के बीच भरोसा पैदा किया है।

उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस अब कमजोर स्थिति में पहुंच गई है और उसकी हैसियत एक क्षेत्रीय पार्टी जैसी भी नहीं रह गई है। कांग्रेस समाजवादी पार्टी के सहारे दोबारा राजनीतिक जमीन तलाशने की कोशिश कर रही है। सीएम योगी आदित्यनाथ की यह बात सही है कि लंबे समय तक सत्ता में रहने वाले दलों की विचारधारा और नीतियों को जनता ने नकार दिया है।

अयोध्या दौरे को लेकर सतीश पूनिया ने कहा कि वह उस पीढ़ी से आते हैं, जिसने दोनों बार कारसेवा में हिस्सा लिया था।

उन्होंने 1990 के दशक की घटनाओं को याद करते हुए कहा कि उस समय कारसेवकों पर गोलियां चलाई गई थीं। वह इस घटना के साक्षी रहे हैं। इस दौरान उन्होंने अपना एक साथी खोया था, जबकि उनका एक अन्य साथी घायल हुआ था। राम मंदिर के निर्माण से यह स्पष्ट हो गया कि यह केवल पत्थरों से बनी इमारत नहीं, बल्कि भगवान राम का भव्य मंदिर है। प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में देश में सांस्कृतिक पुनरुत्थान का नया दौर शुरू हुआ है। भारत की सदियों पुरानी सनातन परंपरा पर मुगलों, अंग्रेजों और अन्य आक्रांताओं के शासनकाल में आघात हुए, लेकिन 500 वर्षों का संघर्ष और लाखों लोगों का बलिदान व्यर्थ नहीं गया। भव्य राम मंदिर के निर्माण ने न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया को देश के सांस्कृतिक पुनरुत्थान का संदेश दिया है।