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अल नीनो का असर बेहद गंभीर, फरवरी 2027 तक चरम पर पहुंचने की आशंका: तेलंगाना के मुख्य सचिव

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हैदराबाद, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। तेलंगाना के मुख्य सचिव संजय जाजू ने गुरुवार को कहा कि अल नीनो का प्रभाव फिलहाल बेहद गंभीर है और फरवरी 2027 तक इसके चरम पर पहुंचने की आशंका है। उन्होंने कहा कि अल नीनो के कारण मानसून काफी प्रभावित हुआ है और तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि दर्ज की गई है।

सिंगूर बांध के दौरे के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य सरकार मौजूदा स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि गुरुवार शाम होने वाली कैबिनेट की बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

जाजू ने कहा कि सिंगूर बांध का दौरा पेयजल की उपलब्धता और खेतों में खड़ी फसलों की स्थिति का आकलन करने के लिए किया गया। उन्होंने सभी विभागों को अगले 15 से 20 दिनों के दौरान खड़ी फसलों को बचाने के लिए समन्वय के साथ काम करने का निर्देश दिया।

मुख्य सचिव ने कहा कि भूजल स्तर में भारी गिरावट के कारण बिजली उपलब्ध होने के बावजूद सिंचाई के लिए पानी मिलना मुश्किल हो सकता है। इसे देखते हुए उन्होंने अधिकारियों को पेयजल की जरूरतों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने बताया कि राज्य के प्रत्येक जिले में नोडल अधिकारी तैनात किए जा रहे हैं। जिला कलेक्टर की निगरानी में बिजली और कृषि विभाग के अधिकारी किसानों के बीच उपलब्ध रहेंगे, ताकि जमीनी स्थिति के अनुरूप आवश्यक योजनाएं तैयार की जा सकें।

मुख्य सचिव ने अल नीनो के कारण मौसम के बदलते पैटर्न और राज्य में जल उपलब्धता पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन करने के लिए संगारेड्डी जिले में अपना क्षेत्रीय दौरा शुरू किया। इस दौरान उन्होंने सिंगूर और मंजीरा जलाशयों में पानी के स्तर का निरीक्षण किया।

उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी की। इसमें हैदराबाद के साथ-साथ संगारेड्डी, कामारेड्डी, निजामाबाद और मेडक जिलों में पेयजल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार की आकस्मिक कार्ययोजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई।

सिंगूर और मंजीरा जलाशयों में जल भंडारण घटने के मद्देनजर जाजू ने अधिकारियों को उपलब्ध जल संसाधनों का कुशलतापूर्वक उपयोग करने और भविष्य में पेयजल की जरूरतों को पूरा करने के लिए एहतियाती उपायों को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया।

उन्होंने कहा कि भूजल स्तर में गिरावट को देखते हुए जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। अधिकारियों को अगले 15 दिनों के लिए पानी की उपलब्धता का आकलन करने और उसके अनुसार आवश्यक संचालन संबंधी कदम उठाने को कहा गया है।

जाजू ने संबंधित विभागों को मौसम में बदलाव के कारण फसलों पर पड़ने वाले प्रभाव की लगातार निगरानी करने का भी निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि अगले 15 से 20 दिन खेतों में खड़ी फसलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है। कृषि विभाग के अधिकारियों को किसानों को मौके पर ही आवश्यक मार्गदर्शन देने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्य सचिव ने बताया कि कृषि संबंधी जरूरतों के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश बिजली विभाग को दिए गए हैं। उन्होंने कृषि, बिजली और सिंचाई विभागों से मौजूदा मौसम की स्थिति और पानी की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए आपसी समन्वय के साथ काम करने को कहा।

उन्होंने अधिकारियों को स्वयं जमीनी स्थिति का आकलन करने, किसानों और स्थानीय निवासियों से बातचीत कर उनकी जरूरतों को समझने तथा सरकार की ओर से उठाए जा रहे एहतियाती कदमों के बारे में आम लोगों को जागरूक करने का भी निर्देश दिया।