नई दिल्ली, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में धर्मांतरित मुसलमानों को दिए जा रहे आरक्षण लाभ को रद्द करने के मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तमिलनाडु सरकार की याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट के फैसले पर मुहर लगा दी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय आलोक ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “मैं इस फैसले के लिए सुप्रीम कोर्ट और उसके पहले मद्रास हाईकोर्ट की खुले शब्दों से प्रशंसा करता हूं। इस पर और स्पष्टता होनी चाहिए कि ये आरक्षण का लाभ कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका तीनों जगह हर स्तर पर लागू हो। चाहे अनुसूचित जाति, जनजाति या ओबीसी हो, सभी जगह इसे बहुत ही स्पष्टता के साथ लागू करना चाहिए। ये देश के लिए बहुत जरूरी है।”
भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा, “जो लोग भी आरक्षण की बात करते हैं, उन्हें संविधान सभा की उस बहस को पढ़ना चाहिए जिसमें बताया गया है कि भारतीय संविधान में आरक्षण का प्रावधान कैसे आया। इसका आधार छुआछूत था। जब लोगों के साथ इस तरह का बुरा बर्ताव होता था, तो उसी आधार पर आरक्षण की व्यवस्था लाई गई थी। जब कोई अपना धर्म बदल लेता है तो बुरे बर्ताव और छुआछूत जैसी बातें पूरी तरह खत्म हो जाती हैं लेकिन कुछ लोग, सिर्फ वोट बैंक की राजनीति के चलते, जानबूझकर धर्म परिवर्तन के बाद भी ऐसे आरक्षण को जारी रखने का समर्थन करते हैं।”
वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री दानिश अंसारी ने कहा, “हम सभी एकता और विश्वास के साथ देश को आगे लेकर जाएं, यही हमारा प्रयास होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला है, वह सर्वमान्य है।”
दरअसल, जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस वी. चंद्रशेखर की पीठ ने तमिलनाडु सरकार की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) को खारिज कर दिया, जिसमें मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने 9 मार्च 2024 को जारी सरकारी आदेश को रद्द कर दिया था। इस सरकारी आदेश में पिछड़े वर्गों, अतिपिछड़े वर्गों, विमुक्त समुदायों और अनुसूचित जातियों के लोगों को इस्लाम अपनाने के बाद पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) के तौर पर आरक्षण का लाभ लेने की अनुमति दी गई थी।
सर्वोच्च न्यायालय ने संवैधानिक सिद्धांतों के आधार पर हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया। अदालत ने कहा कि हिंदू सामाजिक व्यवस्था में पिछड़ा वर्ग या अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखने वाला कोई व्यक्ति धर्म परिवर्तन करके किसी दूसरे धर्म को अपनाने के बाद आरक्षण का लाभ स्वतः ही अपने साथ नहीं ले जा सकता।
