चंडीगढ़, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने शुक्रवार को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को फ्रांस जाने की अनुमति दे दी। केंद्र सरकार ने उन्हें राजनीतिक मंजूरी देने से इनकार कर दिया था, जिसका कारण मुख्यमंत्री के लिए सुरक्षा खतरा और फ्रांसीसी सरकार की ओर से कोई औपचारिक निमंत्रण न होना बताया गया था।
वहीं, राज्य सरकार ने केंद्र पर आरोप लगाया कि वह मुख्यमंत्री की विदेश यात्राओं को लेकर भेदभावपूर्ण रवैया अपना रहा है।
न्यायमूर्ति त्रिभुवन दहिया की पीठ ने राज्य सरकार और केंद्र सरकार की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश पारित किया।
विदेश मंत्रालय द्वारा सीएम मान की 15 से 21 अक्टूबर तक फ्रांस की प्रस्तावित यात्रा के लिए राजनीतिक मंजूरी देने से इनकार करने के बाद सरकार ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इस यात्रा में मान के साथ मुख्य सचिव केएपी सिन्हा और मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव रवि भगत भी शामिल होने वाले थे। इस प्रतिनिधिमंडल की यात्रा का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पंजाब के कृषि और खाद्य-प्रसंस्करण उत्पादों को बढ़ावा देना और व्यापार के अवसरों की तलाश करना था।
राज्य सरकार की याचिका के अनुसार, यह प्रस्तावित यात्रा ‘एसआईएएल पेरिस 2026’ से जुड़ी थी, जो खाद्य उद्योग की एक अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी है। इसका आयोजन 17 से 21 अक्टूबर तक पेरिस नॉर्ड विलेपिंटे में होना है।
पंजाब स्टेट कोऑपरेटिव सप्लाई एंड मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड (मार्कफेड) को, एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (एपीईडीए) के तहत आयोजित इंडिया पैवेलियन में एक स्टॉल आवंटित किया गया था।
सरकार ने तर्क दिया कि इस दौरे से पंजाब के कृषि उत्पादों को प्रदर्शित करने, स्थानीय व्यवसायों को विदेशी खरीदारों से जोड़ने और निवेश आकर्षित करने में मदद मिलेगी। साथ ही, यह भी बताया गया कि इस दौरे का खर्च मार्कफेड उठाएगा।
राज्य सरकार ने अपनी याचिका में राजनीतिक मंजूरी न दिए जाने को चुनौती दी है। उनका तर्क है कि यह फैसला बिना कोई कारण बताए लिया गया और उन्हें अपनी यात्रा का उद्देश्य स्पष्ट करने का मौका भी नहीं दिया गया। राज्य सरकार ने इस फैसले को मनमाना करार दिया और आरोप लगाया कि यह राज्य सरकार के कार्यकारी कार्यों में दखल है। साथ ही, उन्होंने आधिकारिक विदेशी दौरों के लिए अनुमति देने में भेदभावपूर्ण व्यवहार किए जाने पर भी चिंता जताई।
केंद्र सरकार ने सुरक्षा चिंताओं और खालिस्तानी तत्वों से मुख्यमंत्री को संभावित खतरों का हवाला देते हुए इस दौरे का विरोध किया। इसके अलावा, केंद्र ने इस बात पर भी सवाल उठाए कि फ्रांसीसी सरकार की ओर से कोई औपचारिक निमंत्रण नहीं मिला है, और यह भी पूछा कि यात्रा के दौरान मान की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं।
राज्य सरकार ने जवाब दिया कि भारतीय मिशन और फ्रांसीसी अधिकारियों के साथ मिलकर जरूरी इंतजाम किए जा सकते हैं। दलीलों पर विचार करने के बाद, हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका मंजूर कर ली, जिससे राजनीतिक मंजूरी न मिलने के कारण पैदा हुई कानूनी बाधा दूर हो गई।
