कोलकाता, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। तृणमूल कांग्रेस के सदस्य और पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री इस साल वहां से नदारद हैं। पूर्व मंत्री सामुदायिक दुर्गा पूजा समितियों का प्रमुख चेहरा हुआ करते थे।
लेक टाउन की मशहूर ‘श्रीभूमि स्पोर्टिंग’ हमेशा से पूर्व अग्निशमन सेवा मंत्री सुजीत बोस की पूजा के रूप में जानी जाती रही है।
हालांकि, इस साल बोस के इस पूजा में शामिल होने की संभावना बहुत कम है। पश्चिम बंगाल में नगर पालिकाओं में नौकरियों से जुड़े करोड़ों रुपए के घोटाले में कथित संलिप्तता के आरोप में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद, वे फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
इस हफ्ते की शुरुआत में कलकत्ता हाई कोर्ट की एकल पीठ ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसका मतलब है कि बोस को पूरी दुर्गा पूजा जेल के अंदर ही बितानी होगी।
इसी तरह, पश्चिम बंगाल के पूर्व नगर मामलों और शहरी विकास मंत्री तथा कोलकाता के पूर्व मेयर फिरहाद हकीम, दक्षिण कोलकाता की ‘चेतला अग्रानी’ सामुदायिक दुर्गा पूजा का मुख्य चेहरा हुआ करते थे।
हालांकि हकीम अभी भी विधायक हैं और तृणमूल कांग्रेस में ऋतब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के साथ हैं, लेकिन इस बार ‘चेतला अग्रानी’ की दुर्गा पूजा में उनकी भागीदारी न के बराबर है।
पूर्व बिजली और युवा एवं खेल मंत्री अरूप बिस्वास का नाम ‘सुरुचि संघ’ की दुर्गा पूजा आयोजन समिति की सूची से पूरी तरह हटा दिया गया है। पिछले साल इसी पूजा को ‘अरूपदा की पूजा’ के रूप में जाना जाता था।
पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी का ‘नकटला उदयन संघ’ से जुड़ाव हमेशा चर्चा का विषय रहा है। हालांकि, जुलाई 2022 में पश्चिम बंगाल के करोड़ों रुपए के स्कूल नौकरी घोटाले में कथित संलिप्तता के आरोप में ईडी द्वारा पार्थ चटर्जी की गिरफ्तारी के बाद, इस पूजा आयोजन का आकर्षण काफी कम हो गया।
लगभग तीन साल जेल में बिताने के बाद, उन्हें पिछले साल रिहा कर दिया गया था। लेकिन तब से उन्होंने ‘नकटला उदयन’ की दुर्गा पूजा से अपना नाता पूरी तरह तोड़ लिया है।
इस साल उन्होंने अपने बचपन के कुछ दोस्तों के साथ घर पर ही रहने का फैसला किया है; उनके अनुसार, ये दोस्त आज भी उनके शुभचिंतक हैं।
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस साल खुद किसी भी पूजा का उद्घाटन नहीं किया है।
डायमंड हार्बर के लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी भी इस साल उनसे जुड़े नहीं रहे हैं।
