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केंद्रीय मंत्री करंदलाजे ने कर्नाटक में स्टिंग ऑपरेशनों की एसआईटी जांच की मांग की

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मैसूरु, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। लघु एवं मध्यम उद्यम तथा श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने सोमवार को आरोप लगाया कि कर्नाटक सरकार सत्ता में बने रहने के लिए ब्लैकमेल का सहारा ले रही है। उन्होंने राजनीतिक नेताओं को निशाना बनाकर किए गए कथित स्टिंग ऑपरेशनों की तत्काल विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराने की मांग की।

मैसूर में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी पार्टी और राज्य सरकार के भीतर राजनीतिक मामलों को संभालने और सत्ता में बने रहने के लिए ब्लैकमेल का सहारा लिया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि स्टिंग ऑपरेशन किए जा रहे हैं और कुछ लोगों को डराने-धमकाने के लिए ऐसी सीडी का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिनमें आपत्तिजनक सामग्री होने का आरोप है।

उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी जानकारी है कि पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य सिद्दारमैया को इन्हीं स्टिंग ऑपरेशनों का इस्तेमाल करके मुख्यमंत्री का पद छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था।

करंदलाजे ने इस कथित चलन को राज्य के लिए एक कलंक बताया और इसमें शामिल लोगों पर सत्ता पाने और उसे बनाए रखने के लिए अनैतिक तरीकों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। इन घटनाओं ने कर्नाटक के बाहर भी लोगों का ध्यान खींचा है और दूसरे राज्यों के लोग सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर राज्य में हो क्या रहा है।

उन्होंने कहा कि इससे किसी का भला नहीं होने वाला। इस तरह की चीजें खत्म होनी चाहिए। राज्य सरकार इन कथित स्टिंग ऑपरेशनों की एसआईटी जांच का आदेश दे और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाए।

उन्होंने राज्य सरकार से तुरंत कार्रवाई करने की अपील करते हुए कहा कि मैं इस मामले में मुख्यमंत्री शिवकुमार से आग्रह कर रही हूं। लोग आप पर उंगली उठा रहे हैं, ऐसे में मामले की एसआईटी जांच कराई जाए।

वहीं, कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष और विधायक बीवाई. विजयेंद्र ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से आग्रह किया है कि स्टिंग ऑपरेशन के मामले को गंभीरता से लेना चाहिए और इसकी व्यापक जांच कराकर इसे तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाना चाहिए।

इस बीच, अधिकारियों ने बीते शनिवार को बताया कि कर्नाटक पुलिस स्टिंग ऑपरेशन विवाद और सिद्दारमैया से कथित तौर पर जुड़े एक वीडियो के अपलोड होने की जांच कर रही है। पुलिस ने यूट्यूब को पत्र लिखकर तकनीकी विवरण मांगे हैं। इनमें वह आईपी एड्रेस शामिल है जिससे वीडियो अपलोड किया गया था और उस व्यक्ति के बारे में जानकारी भी मांगी गई है जिसने इसे अपलोड किया था।