बीड, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र की पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन और पशुपालन मंत्री पंकजा मुंडे ने मंगलवार को भगवानगढ़ में पारंपरिक दशहरा रैली के दौरान भाषण दिया। उन्होंने दुनिया भर में चल रही उथल-पुथल का जिक्र करते हुए युवा पीढ़ी को एक कड़ा संदेश दिया और साथ ही महाराष्ट्र में सामाजिक एकता और सूखे से राहत के लिए अपना विजन भी सामने रखा।
फ्रांस, रूस-यूक्रेन और ईरान जैसे देशों में मची उथल-पुथल के संदर्भ में, वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री गोपीनाथ मुंडे की बेटी पंकजा मुंडे ने कहा कि देश को ऐसे युवाओं की जरूरत नहीं है, जिनमें देशभक्ति की कमी हो, जो देश का अनादर करते हों या जो खुद को नुकसान पहुंचाने वाले कामों में शामिल हों।
युवाओं को ‘जेन-जी’ कहकर संबोधित करते हुए, उन्होंने जोर दिया कि आज की पीढ़ी के लिए सच्चा नेतृत्व ताकत या आक्रामकता से नहीं, बल्कि बुद्धि और ठोस मुद्दों से आना चाहिए। उन्होंने जयप्रकाश नारायण और अपने दिवंगत पिता गोपीनाथ मुंडे जैसे वरिष्ठ नेताओं का उदाहरण दिया, जिन्हें उन्होंने देश का आदर्श सिपाही बताया।
युवाओं से बात करते हुए, मुंडे ने एक ऐसी ‘जेन-जी’ पीढ़ी का आह्वान किया जो देशभक्त हो और जिसके मन में देश के प्रति सम्मान हो। उन्होंने कहा कि आज के नेतृत्व को आने वाली पीढ़ी को सही दिशा दिखानी चाहिए। उन्होंने सामाजिक सद्भाव, युवाओं के सशक्तीकरण और जातिगत भेदभाव को खत्म करने पर जोर दिया।
सूखे के हालात के बावजूद समर्थकों की भारी भीड़ को संबोधित करते हुए, मुंडे ने कहा कि सिर्फ जाति पर आधारित राजनीति का कोई भविष्य नहीं है।
उन्होंने भगवान बाबा की आध्यात्मिक विरासत का जिक्र करते हुए कहा, “हमें जाति और बंटवारे की दीवारों को गिराना होगा। जो नेता जाति के आधार पर राजनीति करके आगे बढ़ना चाहते हैं, उनका कोई भविष्य नहीं है।”
आम लोगों के साथ अपने जुड़ाव को दर्शाते हुए, मुंडे ने एक शेर पढ़ा, “लग चुकी है तलब जीत की, अब खुद को आग में झोंक देते हैं।”
उन्होंने अपने समर्थकों की ताकत की तुलना मधुमक्खियों के झुंड से की, जो छेड़े जाने पर अपने छत्ते की रक्षा के लिए आक्रामक हो जाते हैं। उन्होंने अपने समर्थकों के प्रति अपनी निष्ठा जताते हुए कहा कि अगर वह अपनी खाल से उनके लिए जूते भी बना दें, तो भी उनकी वफादारी का कर्ज नहीं चुका पाएंगी।
राज्य में चल रहे सूखे के हालात पर बात करते हुए, मुंडे ने उन ताकतों के खिलाफ चेतावनी दी जो समुदायों के बीच दीवारें खड़ी करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग जाति-आधारित राजनीति के जरिए आगे बढ़ना चाहते हैं, उनका कोई भविष्य नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल शिक्षित और प्रशिक्षित लोग ही देश को सही दिशा दे सकते हैं। सूखा किसी को नहीं बख्शता, चाहे वह किसी भी धर्म का हो या कितना भी अमीर क्यों न हो। सामाजिक सद्भाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, मुंडे ने घोषणा की कि उन्होंने (जालना जिले के) अंतरवाली गांव को गोद लिया है।
उन्होंने वादा किया कि वे इस गांव के विकास के लिए उसी लगन और स्नेह के साथ काम करेंगी, जैसा उन्होंने बीड के लिए दिखाया है। अंतरवाली गांव हाल ही में मराठा आरक्षण समर्थक कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल के विरोध-प्रदर्शनों के कारण सुर्खियों में रहा है।
मुंडे ने समर्थकों को भरोसा दिलाया कि वे प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री फडणवीस के साथ मिलकर काम करेंगी। इस संकट के समय किसानों की मदद के लिए वे सीएसआर फंड और चारे के लिए मिलने वाली अनुदान राशि का उपयोग करेंगी।
