चेन्नई, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। डीएमके विधायक और पूर्व वित्त मंत्री थंगम थेन्नारासु ने मंगलवार को तमिलनाडु सरकार के बेहतर वित्तीय प्रबंधन के दावे पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि उधार में कमी का मतलब विकास कार्यों पर खर्च में कमी और ठेकेदारों के बिलों के भुगतान में देरी हो सकता है।
सत्ताधारी सरकार की इस घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए कि 2026-27 की पहली छमाही में उधार में 21 प्रतिशत की कमी आई है, उन्होंने पूंजीगत व्यय, बुनियादी ढांचे में निवेश और बकाया बिलों का विस्तृत विवरण सार्वजनिक करने की मांग की।
सरकार द्वारा दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-सितंबर 2026 के दौरान सरकारी प्रतिभूतियों (गवर्नमेंट सिक्योरिटीज) के जरिए ली गई उधारी घटकर 40,500 करोड़ रुपए रह गई, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 51,300 करोड़ रुपए थी।
थेन्नारासु ने तर्क दिया कि केवल उधारी में कमी आने से बेहतर वित्तीय प्रबंधन साबित नहीं होता। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या उसने विकास परियोजनाओं पर खर्च जारी रखा है और पूरे हो चुके कार्यों के लिए भुगतान कर दिया है।
उन्होंने सवाल किया, “क्या बकाया भुगतान को बचत माना जा सकता है?” उन्होंने पूछा कि क्या प्रशासन वित्तीय अनुशासन का श्रेय ले सकता है, जबकि वह परियोजनाओं में देरी कर रहा है और ठेकेदारों के भुगतान रोक कर रखे हुए है।
पिछली सरकार से तुलना करते हुए, उन्होंने कहा कि डीएमके सरकार ने अपने 2025-26 के बजट में पूंजीगत व्यय के लिए 57,231 करोड़ रुपए आवंटित किए थे।
उन्होंने बताया कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) के अनंतिम मासिक खातों के अनुसार, अप्रैल से सितंबर 2025 के बीच मेट्रो रेल कार्यों सहित विभिन्न पूंजीगत परियोजनाओं पर 13,002.22 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे।
उन्होंने टीवीके सरकार से मांग की कि वह इस साल अप्रैल-सितंबर की अवधि के लिए खर्च के आंकड़े जारी करे, नए बुनियादी ढांचे में किए गए निवेश की जानकारी दे, और डीएमके शासनकाल में शुरू की गई परियोजनाओं के लिए लंबित भुगतानों का खुलासा करे।
थेन्नारासु ने तीसरी तिमाही के लिए सरकार के कर्ज लेने के कार्यक्रम पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि अक्टूबर-दिसंबर के दौरान 48,000 करोड़ रुपए जुटाने का प्रस्ताव, पिछली तिमाही में लिए गए 23,500 करोड़ रुपए के कर्ज से दोगुने से भी अधिक था। आरोप लगाया कि राजस्व प्राप्तियां बजट के अनुमानों से कम रहीं, जिससे प्रशासन के लिए पूंजीगत व्यय को बनाए रखना मुश्किल हो गया।
पूर्व मंत्री ने आगे दावा किया कि हजारों करोड़ रुपए के टेंडर रद्द कर दिए गए, निर्माण कार्य रुक गए और सड़कों की हालत खराब हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके परिणामस्वरूप हजारों लोगों की नौकरियां चली गईं।
सरकार से अपने वित्तीय मामलों का पूरा ब्योरा देने की मांग करते हुए, थेन्नारासु ने कहा कि कम कर्ज लेने के फैसले का आकलन, खर्च और भुगतान की जिम्मेदारियों के साथ किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूंजीगत खर्च और ठेकेदारों के बकाये पर एक पारदर्शी बयान आना जरूरी है, ताकि यह पता चल सके कि यह कमी बेहतर वित्तीय प्रबंधन को दर्शाती है, या फिर इसका मतलब सिर्फ जरूरी विकास कार्यों पर होने वाले खर्च को टालना है।
