बरेली, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के रामपुर दौरे को लेकर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव से पहले आजम खान से मुलाकात के जरिए अखिलेश यादव मुस्लिम मतदाताओं को आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं। मौलाना ने दावा किया कि मुस्लिम समाज समाजवादी पार्टी से नाराज है और इस तरह की राजनीतिक कवायद का चुनाव में पार्टी को कोई खास फायदा नहीं मिलेगा।
इसके अलावा, उन्होंने दिल्ली में दो मस्जिदों और एक दरगाह को जारी नोटिस पर चिंता जताई। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील करते हुए कहा कि नोटिस के बाद लोगों में आशंका और बेचैनी का माहौल है।
मौलाना ने कहा कि दिल्ली में रेस कोर्स मस्जिद, जो प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित है, और चाणक्यपुरी की एक मस्जिद के साथ दरगाह शाह जिलानी मियां को नोटिस दिए जाने की बात सामने आई है। नोटिस में सात दिनों के भीतर मस्जिद खाली करने को कहा गया है। इससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ देशभर के लोगों में चिंता है। उन्होंने आशंका जताई कि मस्जिद खाली कराने के नोटिस को लोग संभावित बुलडोजर कार्रवाई से जोड़कर देख रहे हैं। मौलाना ने अधिकारियों से धार्मिक स्थलों की सुरक्षा करने की अपील की और कहा कि मस्जिदों, मजारों, दरगाहों और कब्रिस्तानों को लेकर मुस्लिम समुदाय के बीच चिंता बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि कुछ मस्जिदें 200, 300, 500 और 700 साल पुरानी हैं, इसके बावजूद उन्हें निशाना बनाए जाने की आशंका जताई जा रही है। मौलाना ने पूजा स्थल अधिनियम, 1991 का हवाला देते हुए कहा कि 15 अगस्त 1947 को धार्मिक स्थलों की जो स्थिति थी, उसे बनाए रखने का प्रावधान है। उन्होंने उज्जैन और सहारनपुर की मस्जिदों से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया। मौलाना ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत भी मस्जिदों के नीचे मंदिर तलाशने से बचने की बात कह चुके हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश में सभी समुदायों के लोगों की भागीदारी जरूरी है और धार्मिक स्थलों के मुद्दे पर तनाव नहीं बढ़ना चाहिए।
अखिलेश यादव के आजम खान से मुलाकात करने की योजना पर मौलाना ने कहा कि यह कदम विधानसभा चुनाव से पहले मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि वह विभिन्न मंचों से लगातार आजम खान का मुद्दा उठाते रहे हैं और यह सवाल करते रहे हैं कि मुश्किल वक्त में अखिलेश यादव उनके साथ मजबूती से क्यों नहीं खड़े हुए। मौलाना ने कहा कि आजम खान ने समाजवादी पार्टी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन उनके कठिन दौर में पार्टी नेतृत्व की भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब चुनाव नजदीक आने के कारण अखिलेश यादव उनसे मुलाकात कर मुस्लिम समाज को राजनीतिक संदेश देना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि पहले आजम खान की बात का मुस्लिम मतदाताओं पर प्रभाव माना जाता था, लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं। रामपुर के चुनावी नतीजों का हवाला देते हुए मौलाना ने कहा कि आजम खान के प्रभाव में कमी आई है और मुस्लिम मतदाता अपने विवेक के आधार पर फैसला करते हैं।
मौलाना ने आगे कहा कि रामपुर के लोगों और आजम खान के समर्थकों के बीच अखिलेश यादव के दौरे को लेकर नाराजगी है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि लोग इस दौरे को लेकर कह रहे हैं, ‘बहुत देर कर दी मेहरबां आते-आते।’ उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम समाज समाजवादी पार्टी से नाराज है और आजम खान से मुलाकात के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश सफल नहीं होगी। विधानसभा चुनाव में इस दौरे से समाजवादी पार्टी को अपेक्षित लाभ मिलने की संभावना नहीं है।
