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असम सरकार का बड़ा फैसला, रिटायरमेंट से 12 महीने पहले शुरू होगी पेंशन प्रक्रिया

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गुवाहाटी, 22 अक्टूबर (आईएएनएस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गुरुवार को राज्य सरकार की उस पहल पर प्रकाश डाला, जिसका उद्देश्य सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के लिए पेंशन प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना है। उन्होंने बताया कि समय पर भुगतान सुनिश्चित करने और कागजी कार्रवाई को कम करने के लिए अब यह प्रणाली सेवानिवृत्ति से 12 महीने पहले ही प्रक्रिया शुरू कर देती है।

मुख्यमंत्री सरमा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में बताया कि ‘फिनअसम’ प्लेटफॉर्म के जरिए लागू की गई इस पहल का मकसद रिटायर होने वाले कर्मचारियों को बेहतर वित्तीय सुरक्षा और मानसिक शांति देना है। इसके तहत जरूरी औपचारिकताओं को समय से पहले ही पूरा कर लिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने इस पहल का मुख्य उद्देश्य बताते हुए कहा, “रिटायरमेंट के समय मानसिक शांति मिलनी चाहिए, न कि कागजी कार्रवाई का बोझ।”

सरमा के अनुसार, यह सिस्टम पेंशन प्रोसेसिंग को जल्दी शुरू करने, डिजिटल वेरिफिकेशन करने और पेंशन पेमेंट ऑर्डर (पीपीओ) को समय पर जारी करने में मदद करता है। पेंशनभोगियों को रिटायरमेंट के लाभ मिलने शुरू हों, इसके लिए पीपीओ का होना जरूरी है।

इस पहल का लक्ष्य रिटायर होने वाले कर्मचारियों के लिए प्रशासनिक बोझ और कागजी कार्रवाई में होने वाली देरी को कम करना है।

राज्य सरकार का इरादा है कि रिटायरमेंट से एक साल पहले ही प्रक्रिया शुरू कर दी जाए, ताकि कर्मचारियों के रिटायर होने से पहले ही पेंशन से जुड़े दस्तावेज और वेरिफिकेशन का काम पूरा हो जाए।

इस डिजिटल सिस्टम से पेंशन मामलों को संभालने वाले विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनेगा। साथ ही औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए सरकारी दफ्तरों के बार-बार चक्कर लगाने की जरूरत भी कम हो जाएगी।

आमतौर पर पेंशन प्रोसेसिंग में दस्तावेज जमा करने, वेरिफिकेशन और मंजूरी के कई चरण होते हैं, जिसकी वजह से कभी-कभी रिटायरमेंट के लाभ मिलने में देरी हो जाती है।

ऐसी देरी से उन कर्मचारियों के सामने वित्तीय अनिश्चितता पैदा हो सकती है, जो नियमित वेतन से पेंशन पर जा रहे हैं।

‘फिनअसम’ पहल के तहत समय से पहले प्रोसेसिंग और डिजिटल वेरिफिकेशन करके इन समस्याओं को दूर करने की कोशिश की गई है। इससे रिटायर होने वाले कर्मचारी प्रशासनिक झंझटों में उलझे बिना, अपने रिटायरमेंट के बाद के जीवन पर ध्यान दे सकेंगे।

यह कदम असम सरकार की उस व्यापक कोशिश का हिस्सा है, जिसके जरिए सरकारी कामकाज को डिजिटल बनाया जा रहा है और सरकारी सेवाओं की डिलीवरी को बेहतर किया जा रहा है।

हालांकि, अभी यह जानकारी उपलब्ध नहीं है कि इस सिस्टम के दायरे में कितने कर्मचारी आते हैं, तय समय के भीतर कितने पेंशन मामलों की प्रोसेसिंग हुई है और पेंडिंग मामलों में कितनी कमी आई है।

यह पहल कितनी कारगर होगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि संबंधित विभागों के बीच समय पर कितना अच्छा तालमेल रहता है और वेरिफिकेशन और मंजूरी की प्रक्रियाएं कितनी सफलतापूर्वक पूरी होती हैं।