भोपाल, 22 अक्टूबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में भोपाल के कई इलाकों के निवासियों ने ‘ड्राफ्ट मास्टर प्लान 2047’ पर हजारों आपत्तियां दर्ज कराई हैं। उन्होंने अपर लेक के कैचमेंट एरिया, ग्रीन जोन और बाघों के आने-जाने के रास्तों (कॉरिडोर) में प्रस्तावित निर्माण कार्यों को लेकर चिंता जताई है और शहर के पारिस्थितिक संतुलन (इकोलॉजिकल बैलेंस) को सुरक्षित रखने की मांग की है।
जॉइंट रेजिडेंट्स स्ट्रगल कमेटी के नेतृत्व में निवासियों ने गुरुवार को टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएनसीपी) कार्यालय में अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। उन्होंने मांग की कि ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने से पहले उसमें बदलाव किए जाएं।
उन्होंने आरोप लगाया कि ड्राफ्ट के कुछ प्रावधानों से आवासीय क्षेत्रों में चल रही अनधिकृत व्यावसायिक गतिविधियों और पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में किए गए निर्माण कार्यों को वैध बनाने का रास्ता खुल सकता है।
याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने कहा कि ‘अपर लेक’ के कैचमेंट एरिया, हरे-भरे इलाकों और बाघों के आवाजाही वाले गलियारों (टाइगर मूवमेंट कॉरिडोर) में निर्माण से जुड़े प्रस्तावित प्रावधान, साथ ही फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) में बढ़ोतरी, भोपाल के पर्यावरण पर बुरा असर डाल सकते हैं।
उन्होंने कहा, “भोपाल का विकास प्लान जल संरक्षण पर केंद्रित होना चाहिए, लेकिन प्रस्तावित प्रावधान शहर के जल निकायों और हरे-भरे इलाकों को खतरे में डाल सकते हैं।”
कमेटी ने शहरीकरण के कारण हरे-भरे स्थानों, झीलों और आर्द्रभूमि (वेटलैंड) के नुकसान पर, बेंगलुरु स्थित ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस’ के टी.वी. रामचंद्र द्वारा की गई रिसर्च का हवाला दिया।
कमेटी का कहना है कि भोपाल को बेंगलुरु के अनुभवों से सीखना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य का विकास प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करे।
निवासियों ने ड्राफ्ट की धारा 15.38 और 15.39 के प्रावधानों का भी विरोध किया। उनका कहना है कि इन प्रावधानों से आवासीय परिसरों में व्यावसायिक गतिविधियों को वैध बनाया जा सकता है और प्रस्तावित ‘मार्केट स्ट्रीट’ कॉन्सेप्ट के जरिए व्यावसायीकरण को बढ़ावा मिल सकता है।
उन्होंने चिंता जताई कि ऐसे प्रावधान स्थापित आवासीय इलाकों, खासकर अरेरा कॉलोनी के स्वरूप को बदल सकते हैं और इससे ट्रैफिक जाम, पार्किंग की समस्या और प्रदूषण बढ़ सकता है।
कमेटी ने कहा, “मास्टर प्लान का इस्तेमाल अवैध निर्माणों को वैधता देने या नागरिक सुविधाओं के नाम पर प्रभावशाली लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।”
निवासियों ने मांग की कि आरजी-3 क्षेत्रों, विशेष रूप से अरेरा कॉलोनी के ई-1 से ई-5 तक के इलाकों, का आवासीय स्वरूप बरकरार रखा जाए। उन्होंने स्वीकृत लेआउट के तहत पार्कों और खुली जगहों के संरक्षण की भी मांग की। साथ ही ‘इंडियन रोड्स कांग्रेस’ की सिफारिशों के अनुसार फुटपाथ, सर्विस रोड और पार्किंग सुविधाओं के विकास की बात कही।
कमेटी ने योजना विभाग से आग्रह किया कि वे सभी आपत्तियों की पारदर्शी तरीके से जांच करें और प्लान को अंतिम रूप देने से पहले निवासियों को अपनी बात रखने का मौका दें। इसमें कहा गया है कि विकास कार्यों में पर्यावरण संरक्षण, जल संसाधनों और नागरिकों के शांतिपूर्ण जीवन जीने के अधिकार को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
साथ ही, यह चेतावनी भी दी गई कि यदि इन चिंताओं का समाधान नहीं किया गया तो याचिकाकर्ता अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह मुद्दा उठा सकता है।
